नई दिल्ली: भारत और ब्राजील ने अपने व्यापारिक एवं आर्थिक संबंधों को अगले स्तर तक ले जाने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। ब्रासीलिया में भारत-ब्राजील व्यापार निगरानी तंत्र (टीएमएम) की आठवीं बैठक में दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 30 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया। बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल और ब्राजील की विदेश व्यापार सचिव तातियाना लैसर्दा प्राजेरेस ने की।
दोनों देशों के अधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला डी सिल्वा के नेतृत्व में विकसित हो रहे द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की। बैठक में व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को व्यापक बनाने के साथ-साथ दोनों देशों के बीच मौजूद संस्थागत तंत्र को और प्रभावी बनाने पर चर्चा हुई।
भारत-ब्राजील व्यापार में पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 15.07 अरब डॉलर तक पहुंच गया। दोनों पक्षों ने इस कारोबार को अधिक संतुलित और विविध बनाने पर जोर दिया। फार्मास्यूटिकल्स, रसायन, इंजीनियरिंग उत्पाद और मशीनरी जैसे क्षेत्रों को व्यापार विस्तार के प्रमुख क्षेत्रों के रूप में देखा जा रहा है।
बैठक के दौरान भारत-मर्कोसुर तरजीही व्यापार समझौते के संदर्भ शर्तों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। दोनों पक्ष इस समझौते के विस्तार और आधुनिकीकरण की संभावनाओं पर आगे बढ़ने के लिए सहमत हुए। वर्ष 2025 में भारत और मर्कोसुर के बीच व्यापार 20.84 अरब डॉलर तक पहुंचने का उल्लेख करते हुए दोनों देशों ने संदर्भ शर्तों को जल्द अंतिम रूप देने की दिशा में काम तेज करने की प्रतिबद्धता जताई।
फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में बाजार पहुंच बढ़ाना भी बातचीत का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। भारत ने ब्राजील में भारतीय दवा उत्पादों के लिए अधिक सुगम और पूर्वानुमानित नियामक व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया। फरवरी 2026 में भारतीय केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) और ब्राजील की नियामक संस्था एएनवीआईएसए के बीच हुए समझौता ज्ञापन को इस क्षेत्र में सहयोग का महत्वपूर्ण आधार बताया गया।
भारत की ओर से यह भी रेखांकित किया गया कि भारतीय कंपनियां किफायती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं की उपलब्धता बढ़ाने में योगदान दे सकती हैं। इससे दोनों देशों के स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग के नए अवसर पैदा होने की संभावना है। कृषि क्षेत्र में भी दोनों देशों ने बाजार पहुंच से जुड़े मुद्दों को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। पौध स्वच्छता संबंधी अनुरोधों की प्राथमिकता के आधार पर समीक्षा और पारस्परिक बाजार पहुंच से जुड़े तकनीकी मामलों को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक मूल प्रमाणपत्रों की पारस्परिक मान्यता से व्यापार प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में प्रगति की समीक्षा की गई।
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, उद्यमिता और शिल्प क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने को भी दोनों देशों ने अहम माना। माना जा रहा है कि इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से छोटे कारोबारियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है। बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग मजबूत करने को लेकर भी दोनों पक्षों ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। ब्रिक्स, जी20 और विश्व व्यापार संगठन जैसे मंचों पर भारत और ब्राजील के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने पर सहमति बनी। भारत ने ब्राजील की ब्रिक्स आर्थिक साझेदारी रणनीति 2030 और वैश्विक मूल्य शृंखला से जुड़ी कार्ययोजना में भागीदारी की सराहना की।
बैठक के दौरान ब्रासीलिया में उच्च स्तरीय भारत-ब्राजील व्यापारिक स्वागत समारोह भी आयोजित किया गया। इसमें 25 से अधिक भारतीय कंपनियों का प्रतिनिधिमंडल शामिल हुआ। किर्लोस्कर समूह, यूपीएल और आदित्य बिरला समूह समेत कई कंपनियों के प्रतिनिधियों ने इसमें हिस्सा लिया। महत्वपूर्ण खनिज, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि व्यवसाय, बुनियादी ढांचा, फार्मास्यूटिकल्स, डिजिटल सेवाएं, लॉजिस्टिक्स और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में कारोबारी संभावनाओं पर चर्चा हुई।दोनों पक्षों ने नई दिल्ली में एपेक्सब्राजील कार्यालय की स्थापना का भी स्वागत किया।
कुल मिलाकर, भारत और ब्राजील ने व्यापार को केवल मौजूदा स्तर तक सीमित रखने के बजाय इसे अधिक विविध और दीर्घकालिक साझेदारी में बदलने की दिशा में कदम बढ़ाया है। 2030 तक 30 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य के साथ फार्मा, कृषि, ऊर्जा, डिजिटल सेवाओं और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने की संभावना है। इससे दोनों उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक रिश्तों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।