वाराणसी: कांग्रेस नेता राहुल गांधी के जन्मदिन के अवसर पर वाराणसी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान लगाए गए पोस्टर को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। पोस्टर में राहुल गांधी को एक हाथ में भगवान परशुराम का फरसा और दूसरे हाथ में संविधान लिए हुए दर्शाया गया था। कार्यक्रम के दौरान पोस्टर का दूध से अभिषेक भी किया गया।
यह पोस्टर सामने आने के बाद ब्राह्मण समाज के कुछ संगठनों और प्रतिनिधियों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि भगवान परशुराम आस्था और धार्मिक परंपरा के प्रतीक हैं, इसलिए उनके प्रतीकों का राजनीतिक संदर्भ में उपयोग उचित नहीं है।
विरोध जताने वालों का आरोप है कि धार्मिक प्रतीकों को राजनीतिक कार्यक्रमों से जोड़ने से अनावश्यक विवाद पैदा हो सकते हैं। उन्होंने पोस्टर को लेकर अपनी नाराजगी सार्वजनिक रूप से व्यक्त की और इसे धार्मिक भावनाओं से जुड़ा विषय बताया।
वहीं कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि पोस्टर का उद्देश्य किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं था। उनका दावा है कि यह कार्यक्रम सामाजिक न्याय, संविधान और भारतीय परंपराओं के सम्मान के संदेश के साथ आयोजित किया गया था।
फिलहाल पोस्टर को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस जारी है। मामले को लेकर विभिन्न संगठनों और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है।