मुंबई इमारत हादसा: घर बदलने से पहले मलबे में दबा परिवार

मुंबई। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच एक बेहद दर्दनाक हादसे ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। जिस परिवार ने खतरे को भांपते हुए अगले दिन अपना घर बदलने का फैसला किया था, वह उससे पहले ही हादसे का शिकार हो गया। परिवार के सदस्य रातभर […]

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  • July 7, 2026 11:59 pm IST, Published 1 hour ago

मुंबई। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच एक बेहद दर्दनाक हादसे ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया। जिस परिवार ने खतरे को भांपते हुए अगले दिन अपना घर बदलने का फैसला किया था, वह उससे पहले ही हादसे का शिकार हो गया। परिवार के सदस्य रातभर सामान पैक कर रहे थे, लेकिन कुछ ही घंटों बाद पड़ोस की जर्जर इमारत उनके टिन-शेड वाले मकान पर भरभराकर गिर गई। हादसे में एक महिला और उसके चार बच्चों की मौत हो गई, जबकि परिवार का मुखिया संयोगवश कुछ देर पहले बाहर निकल जाने के कारण बच गया।

इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर मुंबई में जर्जर और अवैध इमारतों की स्थिति, प्रशासन की लापरवाही तथा लगातार हो रही बारिश के बीच सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बारिश के बीच अचानक गिरी जर्जर इमारत

जानकारी के अनुसार यह हादसा मुंबई के न्यू मंडला क्षेत्र में शनिवार देर रात हुआ। इलाके में कई दिनों से लगातार तेज बारिश हो रही थी। बारिश के कारण चार मंजिला पुरानी इमारत में दरारें पड़ चुकी थीं और उसका एक हिस्सा झुकने लगा था। स्थानीय लोगों का कहना है कि इमारत की हालत काफी समय से खराब थी, लेकिन समय रहते उसे खाली नहीं कराया गया।

शनिवार रात अचानक इमारत का बड़ा हिस्सा भरभराकर नीचे गिर गया और उसके ठीक बगल में बने टिन-शेड वाले मकान को अपनी चपेट में ले लिया। हादसा इतना भीषण था कि पूरा मकान मलबे में दब गया और वहां रहने वाले परिवार को संभलने तक का मौका नहीं मिला।

खतरे का था अंदाजा, अगले दिन बदलना था घर

पड़ोसियों के अनुसार मृतक महिला अख्तर जहां और उनके पति मोहिउद्दीन वाजिद अली शाह को पहले ही खतरे का एहसास हो गया था। लगातार बारिश के कारण बगल की इमारत की हालत बिगड़ती जा रही थी। परिवार ने फैसला किया था कि रविवार को वे यह मकान छोड़कर किसी सुरक्षित स्थान पर चले जाएंगे।

शनिवार रात परिवार के सदस्य सामान पैक करने में जुटे थे। जरूरी घरेलू सामान और कपड़े बांधे जा रहे थे ताकि सुबह होते ही नया घर तलाश कर वहां शिफ्ट हो सकें। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। घर बदलने से पहले ही यह हादसा हो गया और पूरा परिवार मलबे के नीचे दब गया।

पति बाहर निकले और बच गई जान

हादसे के समय मोहिउद्दीन किसी काम से घर से बाहर निकले हुए थे। कुछ ही देर बाद अचानक तेज धमाके की आवाज आई। जब वे वापस लौटे तो देखा कि पूरा मकान मलबे में तब्दील हो चुका है।

उन्होंने बताया कि वे लगातार अपने परिवार को सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए कह रहे थे। अगले दिन घर बदलने की पूरी तैयारी भी हो चुकी थी, लेकिन कुछ घंटे पहले ही इमारत गिर गई। उनकी आंखों के सामने उनका पूरा परिवार खत्म हो गया। इस घटना के बाद वे गहरे सदमे में हैं।

स्थानीय लोगों ने शुरू किया राहत कार्य

हादसे के तुरंत बाद आसपास के लोगों ने पुलिस और दमकल विभाग को सूचना दी। स्थानीय नागरिकों ने भी बिना समय गंवाए राहत कार्य शुरू कर दिया। मलबे को हटाकर लोगों को बाहर निकालने का प्रयास किया गया।

कुछ ही देर में दमकल विभाग, पुलिस, नगर निगम तथा आपदा राहत दल मौके पर पहुंच गए। जेसीबी और अन्य मशीनों की मदद से कई घंटे तक राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया। मलबे से कई लोगों को बाहर निकाला गया, लेकिन परिवार के पांच सदस्यों को बचाया नहीं जा सका।

इलाके में पसरा मातम

हादसे के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। पड़ोसियों का कहना है कि परिवार बेहद मेहनती और शांत स्वभाव का था। किसी को अंदाजा नहीं था कि घर बदलने की तैयारी कर रहा यह परिवार कुछ ही घंटों बाद हमेशा के लिए बिछड़ जाएगा।

घटना के बाद बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। कई लोगों की आंखें नम थीं। हर कोई यही कह रहा था कि यदि समय रहते जर्जर इमारत को खाली करा लिया जाता या प्रशासन ने उचित कार्रवाई की होती तो शायद इतनी बड़ी त्रासदी टाली जा सकती थी।

जर्जर इमारतों पर फिर उठे सवाल

मुंबई में हर मानसून के दौरान जर्जर इमारतों के गिरने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समय-समय पर भवनों का तकनीकी निरीक्षण और उनकी मरम्मत या ध्वस्तीकरण आवश्यक है। यदि खतरनाक घोषित भवनों को समय रहते खाली नहीं कराया जाए तो ऐसे हादसे दोबारा हो सकते हैं।

स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि शहर की सभी खतरनाक इमारतों की तत्काल जांच कराई जाए और जहां खतरा अधिक हो वहां रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित किया जाए।

प्रशासन ने जांच के दिए निर्देश

हादसे के बाद संबंधित विभागों ने घटना की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि इमारत गिरने के कारणों की विस्तृत जांच की जाएगी। यदि किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

इसके साथ ही प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का भी आश्वासन दिया गया है। राहत एवं बचाव दल ने मलबे की पूरी तरह तलाशी लेने के बाद अभियान समाप्त किया।

मुंबई का यह हादसा केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि महानगरों में जर्जर भवनों की अनदेखी का भयावह परिणाम भी है। जिस परिवार ने खतरे को पहचान लिया था और सुरक्षित स्थान पर जाने की तैयारी कर ली थी, वह कुछ घंटों की देरी के कारण हमेशा के लिए बिछड़ गया। यह घटना प्रशासन, भवन मालिकों और नागरिकों सभी के लिए चेतावनी है कि खतरनाक इमारतों को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही भविष्य में और भी बड़ी त्रासदियों को जन्म दे सकती है।

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