बिहार सरकार ने राज्य को पूर्वी भारत का प्रमुख औद्योगिक और विनिर्माण केंद्र बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए बिहार एमएसएमई नीति-2026 का प्रारूप (मसौदा) जारी कर दिया है। इस नई नीति का उद्देश्य बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास को गति देना है।
1 करोड़ एमएसएमई इकाइयों का पंजीकरण।
1 करोड़ से अधिक नए रोजगारों का सृजन।
500 एमएसएमई इकाइयों को वैश्विक वैल्यू चेन से जोड़ना।
प्रतिवर्ष 1 लाख उद्यमियों को विशेष प्रशिक्षण देना।
कोसी, भागलपुर, मुंगेर और पूर्णिया परिक्षेत्र में 4 टेक्नोलॉजी एवं एक्सटेंशन सेंटर की स्थापना।
निवेशकों और उद्यमियों को आकर्षित करने के लिए इस नीति में विशेष अनुदान और सब्सिडी का प्रविधान किया गया है:
क्षेत्रवार पूंजी सब्सिडी:
‘ए’ श्रेणी के जिलों में 25 प्रतिशत सब्सिडी।
‘बी’ श्रेणी के जिलों में 30 प्रतिशत पूंजी सब्सिडी।
इकाई के आकार के अनुसार अधिकतम सीमा:
सूक्ष्म उद्यम: अधिकतम 25 लाख रुपये तक।
लघु उद्यम: अधिकतम 1.5 करोड़ रुपये तक।
मध्यम उद्यम: अधिकतम 5 करोड़ रुपये तक।
विशेष वर्ग के लिए अतिरिक्त अनुदान: महिला, अनुसूचित जाति-जनजाति, पिछड़ा, अति-पिछड़ा, दिव्यांग और मंगलामुखी उद्यमियों को सामान्य से 10 प्रतिशत अतिरिक्त पूंजी अनुदान मिलेगा।
नैनो और मेगा एमएसएमई पार्क: हर जिले में इनकी स्थापना होगी।
10 से 20 एकड़ क्षेत्र वाले नैनो पार्क।
20 एकड़ से अधिक क्षेत्र वाले मेगा पार्क।
इसके अलावा कॉमन फैसिलिटी सेंटर, हेरिटेज क्लस्टर, परीक्षण प्रयोगशालाएं और प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक ढांचे का विकास किया जाएगा।
ईपीएफ प्रतिपूर्ति: नई इकाइयों को पहले तीन वर्षों तक कर्मचारियों के ईपीएफ में नियोक्ता अंशदान की पूरी प्रतिपूर्ति।
बिजली अनुदान: तीन वर्षों तक बिजली शुल्क पर 20 प्रतिशत की छूट।
अन्य रियायतें: रूफटॉप सोलर संयंत्र पर 25 प्रतिशत (अधिकतम 5 लाख रुपये), ऊर्जा एवं जल ऑडिट पर 75 प्रतिशत (अधिकतम 1 लाख रुपये) तथा स्टांप ड्यूटी की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति।
एसजीएसटी प्रतिपूर्ति: छह वर्षों तक एसजीएसटी की 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति।
निर्यात प्रोत्साहन: निर्यात को बढ़ावा देने के लिए प्रति वर्ष अधिकतम 20 लाख रुपये तक की सहायता।
एमएसएमई मित्र व सलाहकार: प्रत्येक जिला उद्योग केंद्र में एमएसएमई केंद्र, प्रखंड स्तर पर ‘एमएसएमई मित्र’ और पंचायत स्तर पर ‘उद्योग सलाहकार’ नियुक्त किए जाएंगे।
फीडबैक / सुझाव: इस मसौदे पर इच्छुक व्यक्ति आगामी 15 दिनों के भीतर ई-मेल के जरिए अपने सुझाव दे सकते हैं, जिसके आधार पर नीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।