लखनऊ। उत्तर प्रदेश को 13 जुलाई को आधुनिक सड़क परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक और बड़ी सौगात मिलने जा रही है। राज्य का पहला बैरियरलेस एक्सप्रेसवे आम जनता के लिए शुरू होने जा रहा है। यह सुविधा लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर लागू की जाएगी, जहां वाहन चालकों को अब टोल प्लाजा पर रुककर टोल टैक्स नहीं देना पड़ेगा। अत्याधुनिक तकनीक की मदद से वाहन चलते-चलते ही टोल भुगतान की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इससे सफर पहले की तुलना में अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक बनेगा।
जानकारी के अनुसार, इस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। उद्घाटन के बाद यह एक्सप्रेसवे प्रदेश की नई पहचान बनने की ओर एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बिना बैरियर के होगा टोल कलेक्शन
अब तक देश के अधिकांश टोल प्लाजा पर वाहन चालकों को बैरियर के सामने रुकना पड़ता था। हालांकि FASTag के आने के बाद समय में काफी बचत हुई, लेकिन फिर भी बैरियर खुलने का इंतजार करना पड़ता था। नई व्यवस्था में बैरियर पूरी तरह समाप्त कर दिए जाएंगे। वाहन अपनी सामान्य गति से गुजरेंगे और टोल राशि स्वतः उनके FASTag खाते से कट जाएगी।
इस तकनीक के लागू होने से टोल प्लाजा पर लगने वाले लंबे जाम की समस्या भी काफी हद तक समाप्त होने की उम्मीद है।
ANPR और RFID तकनीक करेगी पूरा काम
बैरियरलेस टोल प्रणाली के लिए ANPR (Automatic Number Plate Recognition) और RFID (Radio Frequency Identification) तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
टोल प्लाजा से लगभग 500 मीटर पहले लगाए गए हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे वाहन के नंबर प्लेट की तस्वीर लेंगे। इसके साथ ही RFID रीडर FASTag की जानकारी पढ़ेगा। दोनों जानकारियों का मिलान होने के बाद सिस्टम स्वतः टोल शुल्क काट देगा।
यदि किसी वाहन के FASTag में समस्या होगी या नंबर प्लेट स्पष्ट नहीं होगी तो सिस्टम अलग से उसकी पहचान करेगा और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
80 से 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गुजर सकेंगे वाहन
नई तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि वाहन चालकों को टोल प्लाजा पर अपनी गति कम नहीं करनी पड़ेगी। वाहन लगभग 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बिना रुके टोल क्षेत्र पार कर सकेंगे। इससे यात्रा का समय कम होगा और ईंधन की भी बचत होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यवस्था से प्रदूषण में भी कमी आएगी क्योंकि वाहनों को बार-बार ब्रेक लगाने और दोबारा गति पकड़ने की आवश्यकता नहीं होगी।
उत्तर प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि
उत्तर प्रदेश तेजी से एक्सप्रेसवे नेटवर्क विकसित करने वाला देश का अग्रणी राज्य बन चुका है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं के बाद अब बैरियरलेस टोल प्रणाली राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर को नई ऊंचाई देने वाली मानी जा रही है।
सरकार का उद्देश्य यात्रा को तेज, सुरक्षित और डिजिटल बनाना है ताकि लोगों को आधुनिक परिवहन सुविधाओं का लाभ मिल सके।
वाहन चालकों को क्या मिलेगा फायदा?
बैरियरलेस टोल प्रणाली लागू होने के बाद वाहन चालकों को कई लाभ मिलेंगे।
टोल प्लाजा पर रुकने की आवश्यकता नहीं होगी।
यात्रा का समय कम होगा।
ईंधन की बचत होगी।
ट्रैफिक जाम में कमी आएगी।
प्रदूषण कम होगा।
पूरी टोल प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी होगी।
लंबी दूरी तय करने वाले यात्रियों को अधिक सुविधा मिलेगी।
FASTag रखना होगा अनिवार्य
इस नई व्यवस्था का लाभ लेने के लिए वाहन में सक्रिय FASTag होना आवश्यक होगा। यदि FASTag सही तरीके से काम नहीं करेगा या उसमें पर्याप्त बैलेंस नहीं होगा तो वाहन मालिक को नियमानुसार अतिरिक्त शुल्क या अन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
इसलिए वाहन चालकों को सलाह दी जा रही है कि यात्रा से पहले अपने FASTag की स्थिति और बैलेंस अवश्य जांच लें।
आधुनिक तकनीक से बदलेगा सफर
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में देश के अन्य एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी इसी तरह की बैरियरलेस टोल प्रणाली लागू की जा सकती है। इससे भारत की सड़क परिवहन व्यवस्था अधिक स्मार्ट, तेज और विश्वस्तरीय बनेगी।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर शुरू होने वाली यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। डिजिटल तकनीक, तेज यात्रा और बेहतर यातायात प्रबंधन के साथ यह परियोजना राज्य के विकास को नई गति देने में अहम भूमिका निभाएगी। 13 जुलाई को उद्घाटन के बाद लाखों यात्रियों को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।