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बंगाल की खाड़ी हादसा: डूबे ट्रॉलर से 9 मछुआरों के शव बरामद, 6 अब भी लापता

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में दक्षिण 24 परगना के पास बंगाल की खाड़ी में एक डूबे हुए मछली पकड़ने वाले ट्रॉलर से आठ दिन बाद नौ मछुआरों के शव बरामद किए गए हैं। समुद्र में लंबे समय तक रहने के कारण शव बुरी तरह सड़ चुके हैं, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया है। […]

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  • July 14, 2026 6:10 am IST, Published 1 hour ago

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में दक्षिण 24 परगना के पास बंगाल की खाड़ी में एक डूबे हुए मछली पकड़ने वाले ट्रॉलर से आठ दिन बाद नौ मछुआरों के शव बरामद किए गए हैं। समुद्र में लंबे समय तक रहने के कारण शव बुरी तरह सड़ चुके हैं, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो गया है। अब इनकी शिनाख्त केवल डीएनए (DNA) जांच के बाद ही संभव हो सकेगी। इस हादसे में छह अन्य मछुआरे अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश लगातार जारी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस tragic हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया है और प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से प्रत्येक मृतक के परिजनों को दो-दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

कैसे हुआ था हादसा?

  • सफर की शुरुआत: ‘जय मां काली’ नामक यह ट्रॉलर 2 जुलाई को पूर्व मेदिनीपुर जिले के शंकरपुर फिशिंग हार्बर से 15 मछुआरों को लेकर गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए निकला था।

  • संपर्क टूटा: समुद्र में जाने के बाद 6 जुलाई के बाद से इस ट्रॉलर का संपर्क पूरी तरह से टूट गया था।

  • संभावित वजह: शुरुआती जांच में ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि बंगाल की खाड़ी में अचानक खराब हुए मौसम के चलते ट्रॉलर पलट गया होगा, हालांकि वास्तविक कारणों का खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही हो पाएगा।

आठ दिन चला तलाशी और राहत अभियान

जिला प्रशासन के अनुसार, स्थानीय पुलिस और भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) ने करीब आठ दिनों तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद शनिवार को बक्खाली तट से लगभग 35 किलोमीटर दूर ‘बाघेर चार’ के पास इस डूबे हुए ट्रॉलर का पता लगाया।

रविवार को अन्य मछली पकड़ने वाले ट्रॉलरों की सहायता से इसे पाथरप्रतिमा के सीतारामपुर तट तक लाया गया। इसके बाद पूरी रात चले रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान ट्रॉलर के भीतर से इन नौ शवों को बाहर निकाला गया।

ओडिशा के तीन सगे भाई भी शामिल हैं लापता लोगों में

लापता हुए मछुआरों में ओडिशा के बालासोर जिले के रहने वाले तीन सगे भाई—रवींद्र माझी (52), जयराम माझी (49) और जगन्नाथ माझी (45) भी शामिल हैं। उनके परिजनों के अनुसार, वे पहले भी कई बार मछली पकड़ने के लिए शंकरपुर आते रहे थे।

अधिकारियों ने जानकारी दी है कि शुरुआती योजना के अनुसार इस ट्रॉलर पर 16 लोगों को सवार होना था, लेकिन आखिरी वक्त में एक व्यक्ति किन्हीं कारणों से नहीं जा सका था। बाकी के मृतक और लापता मछुआरे पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर, हावड़ा और नदिया जिलों के निवासी हैं। काकद्वीप उप-मंडलीय अस्पताल की मोर्चरी के बाहर अपने अपनों की तलाश में परिजन अब भी बेचैनी से इंतजार कर रहे हैं।

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