मुंबई: मुंबई स्थित टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) का 86वां दीक्षांत समारोह अचानक स्थगित कर दिए जाने से हजारों छात्र-छात्राओं और उनके परिवारों में निराशा और नाराजगी का माहौल है। यह समारोह 2 अगस्त 2026 को आयोजित होना था, लेकिन संस्थान प्रशासन ने कार्यक्रम से ठीक पहले देर रात ईमेल जारी कर इसे अनिश्चितकाल के लिए टालने की जानकारी दी। प्रशासन ने ईमेल में “अप्रत्याशित परिस्थितियों” का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा हालात में समारोह का आयोजन उचित नहीं माना गया।
इस फैसले ने उन छात्रों और अभिभावकों को सबसे अधिक प्रभावित किया है, जिन्होंने पहले से यात्रा, होटल और अन्य व्यवस्थाओं पर भारी खर्च किया था। अचानक लिए गए निर्णय के बाद सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं।
देर रात भेजा गया ईमेल, छात्रों को लगा बड़ा झटका
TISS के रजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से गुरुवार देर रात छात्रों को ईमेल भेजा गया, जिसमें बताया गया कि 86वां दीक्षांत समारोह फिलहाल स्थगित किया जा रहा है। ईमेल में कहा गया कि संस्थान की प्राथमिकता छात्रों, शिक्षकों, कर्मचारियों और आमंत्रित अतिथियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसी कारण कार्यक्रम को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
कई छात्रों ने कहा कि कार्यक्रम से महज कुछ घंटे पहले सूचना मिलने से उन्हें आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी का सामना करना पड़ा। देशभर के विभिन्न राज्यों से मुंबई पहुंच चुके कई छात्र होटल और यात्रा बुकिंग रद्द न होने के कारण नुकसान झेल रहे हैं।
सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद लिया गया फैसला
संस्थान से जुड़े अधिकारियों और छात्र प्रतिनिधियों के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियों से मिले इनपुट के बाद प्रशासन ने कार्यक्रम स्थगित करने का निर्णय लिया। जानकारी के मुताबिक, कुछ संगठनों द्वारा कार्यक्रम के दौरान विरोध-प्रदर्शन की आशंका जताई गई थी।
सूत्रों के अनुसार, प्रशासन को आशंका थी कि विरोध प्रदर्शन के कारण मुख्य अतिथियों, छात्रों और अभिभावकों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। इसी को देखते हुए अंतिम समय में कार्यक्रम स्थगित करने का फैसला लिया गया।
मुख्य न्यायाधीश को होना था मुख्य अतिथि
इस वर्ष आयोजित होने वाले 86वें दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने वाले थे। वहीं, बॉम्बे हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रविंद्र घुगे विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में उपस्थित होने वाले थे।
ऐसे प्रतिष्ठित अतिथियों की मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही कड़ी रखी जा रही थी। हालांकि संभावित विरोध और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण कार्यक्रम को स्थगित करना पड़ा।
TISS ने जारी किया आधिकारिक स्पष्टीकरण
दीक्षांत समारोह स्थगित होने के बाद TISS प्रशासन ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा कि संस्थान ने उपलब्ध सभी परिस्थितियों का गंभीरता से मूल्यांकन किया। प्रशासन का कहना है कि यदि कार्यक्रम मौजूदा माहौल में आयोजित किया जाता तो छात्रों, शिक्षकों, कर्मचारियों और अतिथियों की सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता था।
संस्थान ने यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय पूरी तरह सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है और इसका उद्देश्य किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचना है।
छात्रों और अभिभावकों की बढ़ी परेशानी
समारोह स्थगित होने से सबसे अधिक परेशानी उन छात्रों को हुई है, जिनके परिवार विशेष रूप से दीक्षांत समारोह में शामिल होने के लिए मुंबई पहुंचे थे। कई अभिभावकों ने पहले ही फ्लाइट टिकट, ट्रेन टिकट और होटल बुकिंग करा ली थी। अंतिम समय में कार्यक्रम रद्द होने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
कुछ छात्रों ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यदि प्रशासन को पहले से सुरक्षा संबंधी आशंकाओं की जानकारी थी तो सूचना पहले दी जानी चाहिए थी, ताकि वे अपनी यात्रा योजनाओं में बदलाव कर सकते।
नुकसान की भरपाई पर करेगा विचार
TISS प्रशासन ने कहा है कि वह छात्रों और उनके परिवारों की परेशानियों को समझता है। जिन लोगों को अंतिम समय में कार्यक्रम स्थगित होने के कारण आर्थिक नुकसान हुआ है, उनके आवेदनों पर मामले-दर-मामले विचार किया जाएगा।
संस्थान ने यह भी भरोसा दिलाया कि जल्द ही दीक्षांत समारोह की नई तारीख घोषित की जाएगी ताकि सभी छात्र सम्मानपूर्वक अपनी डिग्री प्राप्त कर सकें।
प्रोविजनल सर्टिफिकेट की मिलेगी सुविधा
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिन छात्रों को नौकरी, उच्च शिक्षा या अन्य आवश्यक कार्यों के लिए तत्काल डिग्री की आवश्यकता है, उन्हें प्रोविजनल सर्टिफिकेट उपलब्ध कराया जाएगा। इससे छात्रों के करियर या आगे की पढ़ाई पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
दीक्षांत समारोह स्थगित होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इस फैसले को लेकर बहस तेज हो गई है। कुछ लोगों ने सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्णय का समर्थन किया, जबकि कई छात्रों और पूर्व छात्रों ने अंतिम समय में सूचना देने पर प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े शैक्षणिक आयोजनों में सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण होती है, लेकिन ऐसे फैसलों की समय पर सूचना देना भी उतना ही आवश्यक है ताकि छात्रों और उनके परिवारों को अनावश्यक परेशानी से बचाया जा सके।
फिलहाल सभी की निगाहें TISS प्रशासन की ओर हैं, जो जल्द ही नई तारीख की घोषणा करने की बात कह रहा है।