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नेपाल बाढ़ में भारत की मदद पर बोले बालेन शाह, कहा थैंक्यू इंडिया

काठमांडू: नेपाल में भीषण बाढ़ और उसके बाद चल रहे राहत एवं बचाव अभियान के बीच प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने भारत और चीन से मिली सहायता के लिए आभार जताया है। बुधवार, 2 सितंबर को संसद में बोलते हुए शाह ने कहा कि इतनी बड़ी आपदा के दौरान अंतरराष्ट्रीय सहयोग से दूरी बनाने का सवाल […]

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  • September 2, 2026 5:35 pm IST, Published 2 hours ago

काठमांडू: नेपाल में भीषण बाढ़ और उसके बाद चल रहे राहत एवं बचाव अभियान के बीच प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने भारत और चीन से मिली सहायता के लिए आभार जताया है। बुधवार, 2 सितंबर को संसद में बोलते हुए शाह ने कहा कि इतनी बड़ी आपदा के दौरान अंतरराष्ट्रीय सहयोग से दूरी बनाने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने बताया कि सरकार ने आपदा के शुरुआती दौर से ही राहत और बचाव के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग लेना शुरू कर दिया था।

प्रधानमंत्री शाह ने भारत की ओर से लगातार मिल रही सहायता का जिक्र करते हुए भारत को धन्यवाद कहा। उन्होंने बताया कि बाढ़ के बाद भारत की ओर से नेपाल को भोजन, दवाइयां और पुल निर्माण से जुड़े जरूरी सामान उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके अलावा बचाव अभियान में तकनीकी विशेषज्ञों की मदद भी दी जा रही है। इनमें डीएनए विशेषज्ञों की टीम भी शामिल है।

संसद में सरकार द्वारा अंतरराष्ट्रीय सहायता लेने में कथित देरी और हिचकिचाहट को लेकर सवाल उठाए गए। इसके जवाब में बालेन शाह ने कहा कि आपदा का पैमाना बहुत बड़ा था और ऐसी स्थिति में दूसरे देशों से सहयोग लेना जरूरी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने शुरुआत से ही अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए प्रयास किए। शाह के मुताबिक, राहत और बचाव अभियान को प्रभावी बनाने के लिए अलग-अलग स्तरों पर उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

भारत और चीन समेत अन्य देशों से मिलने वाली सहायता को इसी प्रयास का हिस्सा बताया गया। नेपाल में 26 अगस्त को अचानक आई भीषण बाढ़ ने बड़े स्तर पर तबाही मचाई। बाढ़ और इससे जुड़ी घटनाओं के बाद अब भी 4,000 से ज्यादा लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। अब तक 1,127 लोगों की मौत की पुष्टि की जा चुकी है। आपदा के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बालेन शाह से फोन पर बातचीत की थी। इस दौरान भारत की ओर से हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया था। इसके बाद भारत की तरफ से राहत सामग्री और विशेषज्ञ दल नेपाल भेजे गए।

भारत की मदद में राहत सामग्री के साथ-साथ बचाव कार्यों के लिए जरूरी तकनीकी संसाधन भी शामिल हैं। बाढ़ से प्रभावित इलाकों में पुलों और अन्य जरूरी बुनियादी ढांचे को दोबारा तैयार करने के लिए सामान भी भेजा गया है। संसद में आपदा के दौरान समय पर सूचना नहीं देने को लेकर भी प्रधानमंत्री से सवाल किया गया। शाह ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार ने नागरिकों को अलर्ट करने के लिए करीब 11 लाख SMS संदेश भेजे थे।

उन्होंने कहा कि जैसे ही सरकार को आपदा की जानकारी मिली, लोगों तक जरूरी सूचना पहुंचाने की कोशिश की गई। शाह ने यह भी कहा कि बाढ़ की गंभीरता और उसका स्वरूप अनुमान से कहीं अधिक था। राहत एवं बचाव कार्यों में राज्य और स्थानीय सरकारों के बीच समन्वय को लेकर उठे सवालों पर भी प्रधानमंत्री ने जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सरकार लगातार राज्य और स्थानीय स्तर के अधिकारियों के संपर्क में है और समन्वय के जरिए राहत कार्य आगे बढ़ाए जा रहे हैं।

शाह ने कहा कि अलग-अलग एजेंसियों और सरकार के विभिन्न स्तरों के बीच सहयोग के जरिए प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। बाढ़ के कारण हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट की टनल में फंसे लोगों के बचाव को लेकर भी संसद में सवाल उठाए गए। प्रधानमंत्री शाह ने कहा कि इस अभियान में राज्य की सभी संबंधित पार्टियां शुरुआत से शामिल हैं।

उन्होंने बताया कि टनल में फंसे लोगों को निकालना सामान्य राहत अभियान से अलग और तकनीकी रूप से कठिन काम है। इसके लिए विशेष तकनीकी जानकारी और संसाधनों की जरूरत है। सरकार अपनी उपलब्ध क्षमता और संसाधनों के आधार पर बचाव अभियान चला रही है। नेपाल सरकार के सामने फिलहाल लापता लोगों की तलाश, प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने और बुनियादी ढांचे को बहाल करने की बड़ी चुनौती है। ऐसे में भारत सहित विभिन्न देशों से मिल रहा सहयोग राहत अभियान के लिए महत्वपूर्ण बना हुआ है।

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