श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के पात्र विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र जारी नहीं किए जाने का मुद्दा राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता इल्तिजा मुफ्ती ने इस मामले को उठाते हुए आरोप लगाया है कि योग्य छात्रों के आवेदन छोटे-छोटे कारणों का हवाला देकर खारिज किए जा रहे हैं। उन्होंने इसे विद्यार्थियों की शैक्षणिक योग्यता और उनके भविष्य के साथ अन्याय बताते हुए प्रभावित छात्रों से आगे आकर अपनी समस्याएं साझा करने की अपील की है।
इल्तिजा मुफ्ती ने बुधवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व वाली जम्मू-कश्मीर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्रों से जुड़ी समस्या का उचित समाधान निकालने में सफल नहीं रही है। उनके मुताबिक, इस प्रक्रिया से उन विद्यार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, जो आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं और सरकारी योजनाओं, शैक्षणिक अवसरों या संबंधित लाभों के लिए प्रमाणपत्र पर निर्भर हैं।
पीडीपी नेता ने उन छात्रों से संपर्क करने को कहा है, जिनके ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र के आवेदन अस्वीकार कर दिए गए हैं। उन्होंने प्रभावित विद्यार्थियों से अपने मामलों का विवरण साझा करने की अपील की, ताकि उनकी समस्याओं को सामने लाया जा सके। हालांकि, उन्होंने अपनी पोस्ट में यह स्पष्ट नहीं किया कि कितने छात्रों के आवेदन खारिज हुए हैं और प्रशासन ने किन कारणों से प्रमाणपत्र जारी करने से इनकार किया है। ऐसे में मामले की व्यापकता और आवेदन निरस्त किए जाने के पीछे की वास्तविक वजहों का पता संबंधित विभागों के आंकड़ों और दस्तावेजों से ही चल सकेगा।
ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के पात्र लोगों के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज है। पात्रता की शर्तें पूरी करने वाले आवेदकों को इसका लाभ मिलना जरूरी है, लेकिन आवेदन प्रक्रिया में दस्तावेजों की कमी, जानकारी में अंतर या अन्य तकनीकी कारणों से दिक्कतें सामने आ सकती हैं। ऐसे मामलों में आवेदन खारिज करने के कारणों की स्पष्ट जानकारी और शिकायतों के निपटारे की प्रभावी व्यवस्था महत्वपूर्ण मानी जाती है। इल्तिजा मुफ्ती के आरोपों के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि प्रभावित विद्यार्थियों की शिकायतों की जांच किस तरह की जाएगी और उन्हें राहत दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
A merit massacre by denying EWS certificates predominantly to Kashmiri students is ongoing at breakneck speed under the nose of an indifferent NC government.
Rightful candidates from Kashmir are being deliberately rejected on frivolous grounds. If you are someone who has applied for EWS only to be denied the certificate please get in touch here.
— Iltija Mufti (@IltijaMufti_) October 28, 2026
छात्रों से जुड़े मुद्दों पर इल्तिजा मुफ्ती की यह हाल के दिनों में दूसरी प्रमुख टिप्पणी है। इससे पहले उन्होंने शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एसकेयूएएसटी) में प्रदर्शन कर रहे फॉरेस्ट्री के विद्यार्थियों से मुलाकात की थी। उस दौरान उन्होंने विशेष फॉरेस्ट्री पदों पर भर्ती के लिए निर्धारित नियमों को लेकर चिंता जताई थी। उनका कहना था कि इस विषय में औपचारिक डिग्री प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों की विशेषज्ञता को भर्ती प्रक्रिया में उचित महत्व मिलना चाहिए। इल्तिजा मुफ्ती के अनुसार, फॉरेस्ट्री की पढ़ाई करने वाले छात्र चार वर्षीय पाठ्यक्रम के दौरान लगभग 80 विषयों का अध्ययन करते हैं। ऐसे में उनकी शैक्षणिक तैयारी और विषयगत ज्ञान को रोजगार के अवसरों से जोड़कर देखा जाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा था कि वे अपनी योग्यता की मान्यता और निष्पक्ष अवसर चाहते हैं।
ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र और फॉरेस्ट्री भर्ती से जुड़े मुद्दों को उठाकर पीडीपी नेता ने विद्यार्थियों की समस्याओं पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की है। दोनों मामलों में छात्रों की पात्रता, योग्यता और अवसरों से जुड़े सवाल प्रमुख हैं। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित सरकारी विभागों का पक्ष और आधिकारिक आंकड़े सामने आने के बाद ही स्थिति का पूरी तरह आकलन किया जा सकेगा। फिलहाल, ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्रों को लेकर उठे विवाद के बीच प्रभावित छात्रों की शिकायतें महत्वपूर्ण होंगी। आवेदन खारिज किए जाने के कारणों की पारदर्शी जानकारी, मामलों की समीक्षा और पात्र विद्यार्थियों को समय पर प्रमाणपत्र उपलब्ध कराना इस समस्या के समाधान की दिशा में अहम कदम हो सकते हैं।