छठ पूजा / बिहार : छठ महापर्व पर अपने घर और परिवार के बीच पहुंचने की चाह रखने वाले बिहार के लाखों प्रवासियों के सामने इस बार सफर की बड़ी चुनौती खड़ी होती नजर आ रही है। दिल्ली, मुंबई, पुणे, बेंगलुरु और देश के दूसरे महानगरों में रहने वाले बिहार के लोग दीपावली के बाद छठ पूजा मनाने के लिए अपने गांव लौटने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन घर पहुंचने का रास्ता आसान नहीं दिखाई दे रहा है। नियमित ट्रेनों में सीटों की भारी मांग, लंबी वेटिंग लिस्ट और हवाई टिकटों की महंगी कीमतों ने यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है।
स्थिति यह है कि जिन यात्रियों को ट्रेन में कन्फर्म टिकट नहीं मिल पा रहा है, उनके सामने हवाई सफर का विकल्प भी काफी महंगा साबित हो रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक पोस्ट में दावा किया गया है कि कुछ उड़ानों का किराया 25 हजार से लेकर 35 हजार रुपये तक पहुंच रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर छठ जैसे महत्वपूर्ण पर्व पर अपने घर लौटने के लिए आम परिवारों को इतना खर्च क्यों करना पड़ रहा है और उनके पास दूसरे कौन-कौन से विकल्प मौजूद हैं?
बिहार में छठ पूजा केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं, बल्कि परिवार, परंपरा और भावनाओं से जुड़ा महापर्व है। देश के अलग-अलग हिस्सों में नौकरी, कारोबार और पढ़ाई करने वाले लाखों लोग इस अवसर पर अपने घर लौटना चाहते हैं। कई परिवार ऐसे हैं जिनके लिए छठ पूजा का मतलब ही पूरे परिवार का एक साथ इकट्ठा होना है। यही वजह है कि दीपावली के बाद बिहार जाने वाली ट्रेनों में यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ जाती है।
दिल्ली से पटना, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, सहरसा, गया और भागलपुर जैसे शहरों की ओर जाने वाली ट्रेनों में त्योहार के आसपास सीटों की मांग काफी अधिक रहती है। यही स्थिति मुंबई, सूरत, अहमदाबाद, पुणे और बेंगलुरु से बिहार जाने वाले यात्रियों के साथ भी देखने को मिलती है।
त्योहार के नजदीक आने पर तत्काल टिकट के लिए भी मारामारी बढ़ जाती है। यात्रियों को टिकट बुकिंग के दौरान लंबी वेटिंग लिस्ट का सामना करना पड़ता है। जिन लोगों को परिवार के साथ यात्रा करनी होती है, उनके लिए एक ही ट्रेन में सभी सदस्यों का कन्फर्म टिकट मिलना और मुश्किल हो जाता है।
ट्रेन में कन्फर्म टिकट नहीं मिलने पर कई यात्री विमान से बिहार पहुंचने का विकल्प तलाशते हैं। लेकिन त्योहार के समय हवाई टिकटों की बढ़ती कीमतें उनके बजट को प्रभावित कर रही हैं। सोशल मीडिया पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, कुछ रूटों पर फ्लाइट का किराया 25 हजार से 35 हजार रुपये तक बताया जा रहा है।
इसका सबसे अधिक असर मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ता है। सामान्य दिनों में विमान से यात्रा करने की योजना बनाने वाले लोग त्योहार के समय बढ़े हुए किराये को देखकर अपना फैसला बदलने पर मजबूर हो जाते हैं। खासकर उन परिवारों के लिए हवाई सफर महंगा साबित होता है, जिनमें तीन से पांच सदस्य एक साथ यात्रा करते हैं।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि 25 से 35 हजार रुपये का किराया हर रूट और हर उड़ान पर लागू नहीं होता। टिकट की कीमत यात्रा की तारीख, उपलब्ध सीटों, एयरलाइन और बुकिंग के समय के अनुसार बदलती रहती है। इसलिए यात्रियों को अलग-अलग तारीखों और एयरलाइंस के किराये की तुलना करनी चाहिए।
त्योहार के दौरान यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए भारतीय रेलवे ने विशेष ट्रेनों की व्यवस्था की है। 5 नवंबर 2026 को प्रकाशित जानकारी के अनुसार, रेलवे बिहार की ओर 106 विशेष ट्रेन सेवाएं संचालित कर रहा है। इनमें वंदे भारत की विशेष सेवाएं भी शामिल हैं। इन ट्रेनों के माध्यम से पटना, दानापुर, पाटलिपुत्र, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, बरौनी, सहरसा, गया, भागलपुर और अन्य प्रमुख स्टेशनों को जोड़ने की व्यवस्था की गई है।
दिल्ली और बिहार के बीच भी कई विशेष ट्रेनें चलाई जा रही हैं। इनमें नई दिल्ली-पटना, आनंद विहार-दानापुर, आनंद विहार-पाटलिपुत्र और दिल्ली-दरभंगा जैसे मार्ग शामिल हैं। रेलवे की ओर से अलग-अलग तारीखों और रूटों पर अतिरिक्त सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
इसके बावजूद यात्रियों की संख्या अधिक होने के कारण सभी लोगों को अपनी पसंद की तारीख और समय पर कन्फर्म टिकट मिलना आसान नहीं है। विशेष ट्रेनों की उपलब्धता के बावजूद यात्रियों को यात्रा से पहले सीटों की स्थिति जांचने की जरूरत है।
ट्रेन और फ्लाइट का किराया बढ़ने के बीच यात्रियों के सामने कुछ दूसरे विकल्प भी मौजूद हैं। थोड़ी योजना बनाकर सफर का खर्च कम किया जा सकता है।
1\. विशेष ट्रेनों की जानकारी लें: रेलवे की ओर से घोषित त्योहार स्पेशल ट्रेनों की सूची चेक करें। कई बार नियमित ट्रेनों में सीट नहीं मिलने पर विशेष ट्रेन में जगह मिल सकती है।
2\. आसपास के स्टेशनों से यात्रा करें: केवल पटना या किसी एक बड़े स्टेशन तक टिकट तलाशने के बजाय अपने गंतव्य के नजदीकी दूसरे स्टेशनों के विकल्प भी देखें। उदाहरण के लिए, जरूरत के अनुसार दानापुर, पाटलिपुत्र, आरा, गया या मुजफ्फरपुर तक की उपलब्धता जांची जा सकती है।
3\. यात्रा की तारीख में बदलाव करें: छठ पूजा से ठीक एक-दो दिन पहले यात्रा करने के बजाय कुछ दिन पहले निकलने पर सीट मिलने की संभावना बेहतर हो सकती है। वापसी की तारीख भी पहले से तय करना फायदेमंद रहेगा।
4\. बस सेवा का विकल्प तलाशें: दिल्ली और अन्य महानगरों से बिहार के विभिन्न शहरों के लिए बस सेवाएं उपलब्ध हो सकती हैं। हालांकि, लंबी दूरी के सफर में यात्रा का समय, किराया और सुरक्षा संबंधी सुविधाएं जरूर जांचें।
5\. फ्लाइट के किराये की तुलना करें: अलग-अलग एयरलाइन और तारीखों पर टिकट की कीमत जांचें। कभी-कभी नजदीकी एयरपोर्ट से यात्रा करना या तारीख बदलना अपेक्षाकृत किफायती साबित हो सकता है।
छठ पूजा के अवसर पर घर लौटने वाले लोगों में बड़ी संख्या ऐसे कर्मचारियों की होती है, जो दूसरे राज्यों में निजी कंपनियों, फैक्ट्रियों, दुकानों और विभिन्न संस्थानों में काम करते हैं। उनके लिए छुट्टी और यात्रा की तारीख तय करना भी आसान नहीं होता।
कई लोगों को सीमित दिनों की छुट्टी मिलती है। ऐसे में वे चाहते हैं कि त्योहार से पहले घर पहुंच जाएं और पूजा समाप्त होने के बाद समय पर अपने कार्यस्थल पर लौट सकें। लेकिन टिकटों की अनुपलब्धता और महंगे किराये के कारण उनकी योजना प्रभावित हो जाती है।
परिवार के साथ यात्रा करने वालों की परेशानी और अधिक है। अकेले यात्री किसी तरह वैकल्पिक व्यवस्था कर सकते हैं, लेकिन छोटे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के साथ लंबी दूरी की यात्रा करना बिना कन्फर्म टिकट के काफी मुश्किल हो सकता है।
छठ जैसे बड़े त्योहारों पर बिहार जाने वाले यात्रियों की संख्या को देखते हुए रेलवे और विमानन सेवाओं के सामने अतिरिक्त दबाव रहता है। रेलवे के लिए केवल विशेष ट्रेन चलाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा, प्लेटफॉर्म पर भीड़ नियंत्रण, साफ-सफाई और समय पर संचालन भी महत्वपूर्ण है।
स्टेशनों पर अतिरिक्त भीड़ होने की स्थिति में यात्रियों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। बिना टिकट यात्रा करने से बचना चाहिए और अनधिकृत एजेंटों से टिकट नहीं खरीदना चाहिए। टिकट बुकिंग के लिए IRCTC की आधिकारिक वेबसाइट और अधिकृत माध्यमों का ही इस्तेमाल करना बेहतर है।
वहीं, एयरलाइंस के लिए भी त्योहार के समय बढ़ती मांग के अनुरूप किराये और सीटों की उपलब्धता यात्रियों की चिंता का विषय बनती है। यात्रियों की अपेक्षा है कि प्रमुख शहरों से बिहार के लिए अतिरिक्त उड़ानों और उचित किराये की व्यवस्था की जाए।
छठ महापर्व के दौरान बिहार लौटने वाले प्रवासियों के लिए घर पहुंचना सिर्फ एक यात्रा नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव का विषय है। परिवार के साथ घाट पर पूजा करना, उगते और डूबते सूर्य को अर्घ्य देना तथा वर्षों पुरानी परंपराओं को निभाना उनके लिए बेहद खास होता है।
ऐसे में ट्रेन टिकटों की कमी और विमान किराये में बढ़ोतरी ने यात्रा की चिंता जरूर बढ़ा दी है। रेलवे की ओर से विशेष ट्रेनों का संचालन राहत देने वाला कदम है, लेकिन यात्रियों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप सीटों की उपलब्धता भी उतनी ही जरूरी है।
अब सवाल यह है कि क्या अतिरिक्त रेल सेवाओं और अन्य परिवहन विकल्पों के माध्यम से सभी प्रवासियों को राहत मिल पाएगी? या फिर इस बार भी हजारों परिवारों को छठ पर घर लौटने के लिए महंगा सफर करना पड़ेगा?
फिलहाल यात्रियों के लिए सबसे बेहतर रास्ता यही है कि वे अंतिम समय का इंतजार न करें, उपलब्ध ट्रेनों और उड़ानों की जानकारी नियमित रूप से जांचें और सुरक्षित यात्रा की योजना बनाएं।