टेक्सास की नवनिर्वाचित गवर्नर जीना हिनोजोसा ने एआई डेटा सेंटर के विस्तार को लेकर महत्वपूर्ण मांग उठाई है। उन्होंने सुझाव दिया है कि नए कानून और नियामकीय व्यवस्था तैयार होने तक डेटा सेंटर के विकास पर अस्थायी रोक लगाई जानी चाहिए। उनका यह रुख टेक उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि अमेरिका की प्रस्तावित डेटा सेंटर क्षमता में टेक्सास की हिस्सेदारी लगभग 25 प्रतिशत बताई जाती है। यदि वहां परियोजनाओं की रफ्तार धीमी होती है तो इसका असर अरबों डॉलर के संभावित निवेश पर पड़ सकता है। अमेरिका में राजनीतिक बदलाव का असर शेयर बाजार में भी दिखाई देने लगा है। अमेरिकी बाजार में टेक्नोलॉजी कंपनियों के शेयरों पर दबाव देखने को मिला।
नैसडैक से जुड़ी कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में लगभग 2.5 ट्रिलियन डॉलर की गिरावट की खबर सामने आई। ऐमजॉन, गूगल, मेटा और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी कंपनियों के शेयरों में कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। निवेशक अब एआई क्षेत्र में कंपनियों की ओर से किए जा रहे भारी खर्च और उससे मिलने वाले संभावित लाभ का आकलन कर रहे हैं। इस बीच भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने पिछले पांच कारोबारी दिनों में भारतीय बाजार में करीब पांच अरब डॉलर का निवेश किया। बताया गया कि गुरुवार को ही विदेशी निवेशकों ने लगभग 15 हजार करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। यह एक साल से अधिक समय में एक दिन की सबसे बड़ी खरीदारी में शामिल रही।
इसी अवधि में सेंसेक्स की कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण में लगभग 29 लाख करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज होने की जानकारी सामने आई। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि अमेरिका में डेटा सेंटर परियोजनाओं पर नियामकीय सख्ती बढ़ती है तो वैश्विक कंपनियां निवेश के लिए दूसरे देशों की ओर देख सकती हैं। भारत इस स्थिति का लाभ उठा सकता है। देश में तेजी से बढ़ता डिजिटल बाजार, इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की बड़ी संख्या, तकनीकी प्रतिभा और डिजिटल सेवाओं की मांग इसे डेटा सेंटर उद्योग के लिए आकर्षक विकल्प बनाती है।
गोल्डमैन सैश की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर पर सालाना एक ट्रिलियन डॉलर तक खर्च होने का अनुमान है। यह अमेरिकी आधुनिक आर्थिक इतिहास के सबसे बड़े निवेश अभियानों में से एक माना जा रहा है। लेकिन राजनीतिक और नियामकीय बदलाव इस निवेश की गति को प्रभावित कर सकते हैं। रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया है कि कई राज्यों में डेमोक्रेटिक पार्टी की मजबूत स्थिति से प्रस्तावित डेटा सेंटर क्षमता के बड़े हिस्से पर नए नियम लागू होने की संभावना बन सकती है।
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की एआई इंडेक्स रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष के अंत तक अमेरिका में 5,427 डेटा सेंटर मौजूद थे। इसके अलावा एआई कंपनियों ने 3,969 नए डेटा सेंटर विकसित करने की घोषणाएं की थीं, जिनमें से लगभग 800 परियोजनाओं पर काम शुरू होने की जानकारी दी गई थी। ये आंकड़े बताते हैं कि अमेरिका में एआई क्षेत्र का विस्तार कितने बड़े स्तर पर हो रहा है।
भारत के सामने अब इस क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करने की चुनौती और अवसर दोनों हैं। यदि देश बेहतर बिजली आपूर्ति, जमीन, नीतिगत स्थिरता और आधुनिक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराता है तो अंतरराष्ट्रीय कंपनियां यहां बड़े निवेश कर सकती हैं। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होने के साथ भारत की तकनीकी क्षमता भी बढ़ेगी। हालांकि, अमेरिकी नीतियों में बदलाव का वास्तविक असर कितना होगा, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा। फिलहाल वैश्विक एआई निवेश की बदलती दिशा पर भारत सहित पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।