दूसरी तरफ बांग्लादेश में मजदूरों का आंदोलन भी सरकार के लिए चुनौती बना हुआ है। औद्योगिक क्षेत्रों में वेतन और श्रमिकों की मांगों को लेकर शुरू हुआ प्रदर्शन कई जगहों पर हिंसक हो गया था। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की खबरें सामने आईं। एक मजदूर की पुलिस की गोली लगने से मौत होने का भी दावा किया गया है। हालात बिगड़ने के बाद सरकार ने नए वेज बोर्ड के गठन की पहल की है। इसके बाद कुछ औद्योगिक इलाकों में फैक्ट्रियां धीरे-धीरे खुलने लगी हैं। हालांकि संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस और बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) की तैनाती अभी भी जारी है।
इस बीच नॉर्थ ईस्ट न्यूज की एक रिपोर्ट ने बांग्लादेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि देश की खुफिया एजेंसी ने सरकार के वरिष्ठ नेताओं को संभावित सत्ता परिवर्तन की कोशिश को लेकर आगाह किया है। रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व के भीतर मतभेद और मजदूर आंदोलन से पैदा हुई परिस्थितियों का फायदा उठाकर सरकार को कमजोर करने की कोशिश हो सकती है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
रिपोर्ट में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के भीतर भी दो गुटों के बीच मतभेद की बात कही गई है। एक गुट को पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के समर्थकों से जुड़ा बताया गया है, जबकि दूसरा गुट तारिक रहमान के करीबियों का माना जा रहा है। कथित तौर पर इन आंतरिक मतभेदों ने सरकार की राजनीतिक चुनौतियां बढ़ा दी हैं।
सबसे चौंकाने वाला दावा देश में आपातकाल लागू कर राष्ट्रीय सरकार बनाने की संभावित योजना को लेकर है। रिपोर्ट के मुताबिक, एक ऐसे राजनीतिक ढांचे पर चर्चा होने की बात कही गई है, जिसमें अलग-अलग राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जा सकता है। इसमें अवामी लीग और जातीय पार्टी की संभावित भागीदारी का भी जिक्र किया गया है। हालांकि इस तरह की किसी योजना पर सहमति बनने या उसे लागू करने का कोई आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है।
इसी बीच बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) से बातचीत में अगले महीने स्वदेश लौटने की इच्छा दोहराई है। उनकी संभावित वापसी ने तारिक रहमान सरकार के सामने एक नई राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। शेख हसीना को बांग्लादेश के एक ट्रिब्यूनल द्वारा मौत की सजा सुनाए जाने के बाद उनकी वापसी का मुद्दा और संवेदनशील हो गया है। उनके देश लौटने पर गिरफ्तारी की संभावना भी जताई जा रही है।
कुल मिलाकर बांग्लादेश इस समय मजदूर असंतोष, राजनीतिक खींचतान और सत्ता के भीतर संभावित मतभेदों से जूझ रहा है। स्पीकर की विदेशी राजदूतों से मुलाकात, खुफिया एजेंसी की कथित चेतावनी और शेख हसीना की वापसी के बयान ने हालात को और दिलचस्प बना दिया है। हालांकि फिलहाल किसी नए सत्ता परिवर्तन या आपातकाल को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि तारिक रहमान सरकार इन चुनौतियों से कैसे निपटती है और बांग्लादेश की राजनीति किस दिशा में आगे बढ़ती है।