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तपती धूप में जनगणना की जंग: कहीं नो एंट्री, कहीं गलत जानकारी से बढ़ी कर्मचारियों की मुश्किलें

देशभर में भीषण गर्मी के बीच चल रही जनगणना ने सरकारी कर्मचारियों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। राजधानी दिल्ली से लेकर गुरुग्राम, पंजाब, गोरखपुर, महाराष्ट्र और भोपाल तक जनगणना कर्मी 45 डिग्री तक के तापमान में घर-घर जाकर सर्वे कर रहे हैं। लेकिन केवल गर्मी ही नहीं, लोगों का सहयोग न मिलना भी […]

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  • May 24, 2026 7:46 am IST, Published 35 minutes ago

देशभर में भीषण गर्मी के बीच चल रही जनगणना ने सरकारी कर्मचारियों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। राजधानी दिल्ली से लेकर गुरुग्राम, पंजाब, गोरखपुर, महाराष्ट्र और भोपाल तक जनगणना कर्मी 45 डिग्री तक के तापमान में घर-घर जाकर सर्वे कर रहे हैं। लेकिन केवल गर्मी ही नहीं, लोगों का सहयोग न मिलना भी उनके लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। कहीं लोग अपनी कारें छिपा रहे हैं, तो कहीं गलत मोबाइल नंबर देकर जानकारी साझा करने से बच रहे हैं। कई इलाकों में कर्मचारियों को सोसायटियों में एंट्री तक नहीं दी जा रही।

सरकार की ओर से जनगणना को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में शिक्षक, आशा वर्कर्स और अन्य सरकारी कर्मचारी रोजाना कई किलोमीटर पैदल चलकर डोर-टू-डोर सर्वे कर रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि सुबह से शाम तक तेज धूप में काम करने के कारण डिहाइड्रेशन, चक्कर और थकान जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। इसके बावजूद समय पर काम पूरा करने का दबाव लगातार बना हुआ है।

दिल्ली और गुरुग्राम में सबसे बड़ी समस्या लोगों द्वारा निजी जानकारी साझा करने में हिचकिचाहट को लेकर सामने आ रही है। कई परिवार आय, संपत्ति और वाहन से जुड़ी जानकारी देने से बच रहे हैं। कुछ लोग जानबूझकर गलत जानकारी दर्ज करा रहे हैं, जबकि कई घरों में बार-बार जाने के बाद भी दरवाजे नहीं खोले जा रहे। कर्मचारियों के अनुसार, कुछ लोग यह सोचकर जानकारी नहीं दे रहे कि भविष्य में टैक्स या अन्य सरकारी जांच बढ़ सकती है।

पंजाब और महाराष्ट्र के कई शहरों में कर्मचारियों को बंद गेट वाली सोसायटियों में प्रवेश पाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। कई जगह सुरक्षा गार्ड बिना अनुमति अंदर नहीं जाने देते। वहीं ग्रामीण इलाकों में समस्या अलग है। गोरखपुर और चंदौली जैसे जिलों में दूर-दराज गांवों तक पहुंचना बेहद कठिन साबित हो रहा है। भीषण गर्मी में कई किलोमीटर पैदल चलकर कर्मचारियों को घरों तक पहुंचना पड़ रहा है।

भोपाल और अन्य शहरों में जागरूकता की कमी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। कई लोगों को अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि जनगणना क्यों जरूरी है और इसका उपयोग किस तरह किया जाता है। इसके कारण लोग कर्मचारियों पर शक करते हैं और कई बार बहस की स्थिति भी बन जाती है। कुछ कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें लोगों को पहले समझाना पड़ता है, उसके बाद ही सर्वे की प्रक्रिया आगे बढ़ पाती है।

जनगणना कर्मियों का कहना है कि प्रशासन की ओर से पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। कई कर्मचारियों को पीने का पानी, छांव या मेडिकल सहायता जैसी बुनियादी सुविधाओं के बिना ही काम करना पड़ रहा है। लगातार बढ़ती गर्मी के बीच लंबे समय तक फील्ड में रहने से स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ रहे हैं।

इसके बावजूद कर्मचारी अपना काम पूरी जिम्मेदारी के साथ कर रहे हैं। उनका कहना है कि जनगणना देश की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में से एक है, क्योंकि इसी के आधार पर सरकारी योजनाएं, संसाधनों का वितरण और विकास की नीतियां तय की जाती हैं। हालांकि कर्मचारियों का मानना है कि लोगों में जागरूकता बढ़ाने और फील्ड स्टाफ को बेहतर सुविधाएं देने की जरूरत है, ताकि यह काम आसानी और सुरक्षित तरीके से पूरा हो सके।

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