मुजफ्फरपुर के एक निजी अस्पताल से दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहां देर रात आईसीयू (ICU) वार्ड में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। इस दर्दनाक हादसे में 4 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 20 से अधिक लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं। चश्मदीदों के अनुसार, मृतकों का आंकड़ा और बढ़ सकता है।
हादसा बुधवार रात करीब 3 बजे हुआ। आग अस्पताल की पांचवीं मंजिल पर स्थित आईसीयू (ICU) वार्ड में लगी। देखते ही देखते पूरा वार्ड घने और काले धुएं के गुबार में तब्दील हो गया।
पांचवीं मंजिल पर आग होने के कारण दमकल विभाग और बचाव दल को शुरुआत में काफी मशक्कत करनी पड़ी। दम घुटते मरीजों को बचाने के लिए दमकलकर्मियों ने बेहद सूझबूझ दिखाई और ICU सहित अन्य वार्डों की खिड़कियां और दरवाजे तोड़कर मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला।
ICU में भर्ती 93 वर्षीय मरीज राधा देवी ने इस खौफनाक मंजर की आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया:
“मैं ICU बेड पर भर्ती थी कि अचानक पूरा कमरा धुएं से भर गया। सांस लेना दूभर था। मैंने बिना वक्त गंवाए तुरंत अपना ऑक्सीजन मास्क हटाया और किसी तरह वार्ड से बाहर भागी। बाहर आते ही मैंने गार्ड को चिल्लाकर बताया कि अंदर भयंकर आग लग चुकी है।”
हादसे के बाद अस्पताल प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आ रही है। पीड़ित परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए हैं:
डॉक्टर और स्टाफ की फरारी: परिजनों का सीधा आरोप है कि जैसे ही आग भड़की, अस्पताल के डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ मरीजों को उनके हाल पर तड़पता छोड़कर मौके से भाग खड़े हुए।
दमकल विभाग की पुष्टि: मौके पर पहुंचे फायर ब्रिगेड के अधिकारी ने भी इस बात की पुष्टि की है कि जब उनकी टीम रेस्क्यू के लिए पहुंची, तो अस्पताल का अधिकांश स्टाफ वहां से नदारद था।
पानी की किल्लत: स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर अस्पताल परिसर में आग बुझाने और पानी की तात्कालिक व्यवस्था दुरुस्त होती, तो कई मासूम जानें बचाई जा सकती थीं।
घटनास्थल पर मौजूद स्थानीय निवासी धीरज गिरी ने बताया, “मैं अस्पताल की छत पर सोया था। अचानक चीख-पुकार सुनकर नीचे आया तो देखा कि बेड पर लोग जान बचाने के लिए छटपटा रहे थे। धुआं इतना घना था कि हाथ को हाथ नहीं सूझ रहा था।”
वहीं, घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। चश्मदीदों का आरोप है कि इस हादसे में असल में 9 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है, लेकिन पुलिस ने मामले को दबाने के लिए जल्दबाजी में शवों को वहां से हटा दिया। इतना ही नहीं, लोगों ने एक नर्स पर भी आरोप लगाया कि वह मृत हो चुके मरीजों को जबरन जीवित बता रही थी ताकि अस्पताल की बदनामी न हो।
फिलहाल, दमकल की गाड़ियों ने आग पर काबू पा लिया है, लेकिन झुलसे हुए कई मरीजों की हालत नाजुक बनी हुई है। प्रशासन मामले की जांच में जुट गया है कि आखिर अस्पताल के पास फायर सेफ्टी एनओसी (NOC) थी या नहीं।