इंदौर: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में ब्रिक्स (BRICS) देशों के कृषि मंत्रियों के दो दिवसीय सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वैश्विक कृषि सहयोग, खाद्य सुरक्षा और छोटे किसानों के सशक्तिकरण को भविष्य की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल बताया।
अपने संबोधन में उन्होंने भारत की सांस्कृतिक विरासत और वैश्विक सहयोग की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत हमेशा से शांति, समन्वय और साझेदारी आधारित विकास का समर्थक रहा है। उन्होंने “वसुधैव कुटुंबकम” और “अतिथि देवो भवः” की भारतीय भावना का जिक्र करते हुए सभी सहभागी देशों के प्रतिनिधियों का स्वागत किया।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि आज दुनिया के सामने जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधनों पर बढ़ता दबाव, कृषि लागत में वृद्धि और बाजार की अनिश्चितता जैसी चुनौतियां मौजूद हैं। ऐसे समय में ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग और अनुभवों का आदान-प्रदान बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि छोटे और सीमांत किसानों को मजबूत बनाया जाए तो वैश्विक खाद्य सुरक्षा का लक्ष्य आसानी से हासिल किया जा सकता है।
केंद्रीय मंत्री ने भारत की कृषि उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए बताया कि पिछले एक दशक में कृषि क्षेत्र ने उल्लेखनीय प्रगति की है। देश का खाद्य उत्पादन लगातार बढ़ा है और कृषि क्षेत्र राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया के सबसे बड़े खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों में से एक का संचालन कर रहा है, जिससे करोड़ों लोगों तक खाद्यान्न पहुंचाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत में लगभग 43 प्रतिशत आबादी की आजीविका कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों पर निर्भर है। किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार सिंचाई, आधुनिक तकनीक, गुणवत्तापूर्ण बीज, डिजिटल सेवाएं और वित्तीय सहायता जैसी कई योजनाएं संचालित कर रही है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, किसान क्रेडिट कार्ड और फसल बीमा जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन पहलों ने किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
शिवराज सिंह चौहान ने विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत में अधिकांश किसान इसी श्रेणी से आते हैं और कृषि विकास की सफलता इनके सशक्तिकरण पर निर्भर करती है। उन्होंने कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर चर्चा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने और पर्यावरण संरक्षण के लिए संतुलित खेती आवश्यक है। उन्होंने किसानों को वैज्ञानिक जानकारी और आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने के प्रयासों का उल्लेख किया और कहा कि इससे कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी संभव हो सकेगा।
महिला सशक्तिकरण को कृषि विकास का महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण महिलाएं कृषि और उससे जुड़े व्यवसायों में नई पहचान बना रही हैं। तकनीकी नवाचारों और डिजिटल समाधानों के जरिए महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है।
युवाओं की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप, ड्रोन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल प्लेटफॉर्म नई संभावनाएं लेकर आए हैं। इससे कृषि क्षेत्र अधिक आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और युवाओं के लिए आकर्षक बन रहा है।
अपने संबोधन के अंत में केंद्रीय मंत्री ने ब्रिक्स देशों से कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, ज्ञान साझा करने और छोटे किसानों के हित में साझा रणनीति विकसित करने की अपील की। उन्होंने विश्वास जताया कि यह सम्मेलन वैश्विक कृषि विकास, खाद्य सुरक्षा और सतत खेती के क्षेत्र में नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा। इंदौर में आयोजित यह सम्मेलन कृषि क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने और भविष्य की चुनौतियों के समाधान खोजने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।