कल्याण बनर्जी ने हाई कोर्ट में उठाए गंभीर सवाल

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर नंदीग्राम विधानसभा चुनाव का मुद्दा चर्चा के केंद्र में आ गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद चुनाव प्रक्रिया और मतगणना को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री ममता […]

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  • June 23, 2026 2:39 pm IST, Published 3 hours ago

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर नंदीग्राम विधानसभा चुनाव का मुद्दा चर्चा के केंद्र में आ गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद चुनाव प्रक्रिया और मतगणना को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दायर चुनावी याचिका पर सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को अदालत के सामने रखा गया।

कल्याण बनर्जी के अनुसार, चुनाव के शुरुआती 12 राउंड तक मतगणना सामान्य तरीके से चल रही थी और किसी प्रकार की आपत्ति नहीं थी। लेकिन 13वें राउंड के दौरान घटनाक्रम अचानक बदल गया, जिसके बाद पूरे चुनाव परिणाम पर सवाल खड़े हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी मतगणना केंद्र के अंदर पहुंचे और वहां मौजूद भाजपा के काउंटिंग एजेंटों को निर्देश दिए गए।

कल्याण बनर्जी ने दावा किया कि मतगणना के दौरान उनकी पार्टी के एजेंटों को केंद्र से बाहर करने की कोशिश की गई। उनका कहना था कि टीएमसी प्रतिनिधियों को कथित रूप से मारपीट कर वहां से हटाया गया, जिससे मतगणना प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हुई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उस दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों की सहायता ली गई, जिसके चलते टीएमसी एजेंट अपनी आपत्तियां दर्ज कराने में सफल नहीं हो सके। बनर्जी का कहना है कि यदि मतगणना के दौरान सभी राजनीतिक दलों के एजेंटों को समान अवसर नहीं मिलता, तो चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

सुनवाई के दौरान TMC की ओर से अदालत के सामने यह मांग रखी गई कि चुनाव से जुड़े सभी डिजिटल और तकनीकी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं। इसमें CCTV फुटेज, VVPAT मशीनों का डेटा, कैमरों की रिकॉर्डिंग और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) से संबंधित सभी सामग्री शामिल है।

कल्याण बनर्जी ने कहा कि यदि इन रिकॉर्ड्स को संरक्षित रखा जाता है, तो भविष्य में किसी भी जांच या कानूनी प्रक्रिया के दौरान सच्चाई सामने लाने में मदद मिल सकती है। उनका मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ऐसे सबूतों का सुरक्षित रहना बेहद आवश्यक है और  2021 के नंदीग्राम विधानसभा चुनाव में नियुक्त रिटर्निंग ऑफिसर की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि जिस अधिकारी ने नंदीग्राम चुनाव की प्रक्रिया संभाली थी, बाद में उन्हें भवानीपुर उपचुनाव में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई।

कल्याण बनर्जी ने नंदीग्राम चुनाव से जुड़े रिटर्निंग ऑफिसर को बाद में मुख्यमंत्री कार्यालय में संयुक्त सचिव का पद मिला। इसके अलावा मुख्य चुनाव अधिकारी और विशेष पर्यवेक्षक के रूप में कार्य कर चुके अधिकारियों को भी महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारियां सौंपी गईं।  फिलहाल नंदीग्राम चुनाव से जुड़ा यह विवाद एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय बन गया है।

 

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