भारत की ‘मिस्टिक सॉन्गस्ट्रेस’ के रूप में विख्यात रागिनी रैनू ने अपने बहुप्रशंसित संगीत कार्यक्रम ‘द मिस्टिक राह’ में सूफी एवं भक्ति संतों की अमर वाणी को अपनी सुमधुर एवं प्रभावशाली प्रस्तुति के माध्यम से जीवंत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह संगीतमय संध्या प्रेम, भक्ति, समरसता और आध्यात्मिक चेतना के शाश्वत संदेश को समर्पित रही, जिसमें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
अपने सशक्त, भावपूर्ण और ओजस्वी स्वर के माध्यम से रागिनी रैनू ने प्रत्येक रचना को गहन संवेदनशीलता एवं आध्यात्मिक अनुभूति के साथ प्रस्तुत किया। उनकी गायकी ने संगीत को केवल एक प्रस्तुति न रहकर आत्मिक अनुभूति का माध्यम बना दिया, जिससे संपूर्ण सभागार भक्ति और सूफियाना रंग में सराबोर हो गया।
महान ‘संत संगीत विभूति’ पंडित भजन सोपोरी की शिष्या रागिनी रैनू अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से उस संगीत परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं, जिसमें शास्त्रीय सौंदर्य, आध्यात्मिक गहराई और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का अद्वितीय समन्वय है।
उनकी प्रस्तुति को श्रोताओं ने भरपूर सराहा तथा तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका अभिनंदन किया।
इस अवसर पर संगीत जगत एवं विभिन्न क्षेत्रों की अनेक विशिष्ट हस्तियाँ उपस्थित थीं, जिनमें संगीत मनीषी पंडित अभय रुस्तम सोपोरी, त्रिनिदाद एवं टोबैगो के उच्चायुक्त महामहिम श्री चंद्रदत्त सिंह, श्रीमती अनीता सिंह, सोहराब सोपोरी, न्यायमूर्ति एस. एन. ढींगरा तथा भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के पूर्व संयुक्त सचिव श्री कोमल आनंद प्रमुख रूप से उपस्थित थे।
रागिनी रैनू के साथ तबले पर उजिथ उदयकुमार, ढोलक पर चंचल सिंह, हारमोनियम पर ललित सिसोदिया तथा सारंगी पर सुभान अली ने संगत कर कार्यक्रम को और अधिक प्रभावशाली बनाया