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राज ठाकरे के आरोपों पर सिद्धिविनायक ट्रस्ट की सफाई, कानून के तहत हुई कार्रवाई

मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में सिद्धिविनायक मंदिर को लेकर उठे दान चोरी के आरोपों ने नई बहस छेड़ दी है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे के आरोपों के बाद अब सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष और विधायक सदा सरवणकर ने पूरे मामले पर विस्तृत सफाई दी है। उन्होंने कहा कि मंदिर में कथित […]

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  • August 4, 2026 12:15 pm IST, Published 1 hour ago

मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में सिद्धिविनायक मंदिर को लेकर उठे दान चोरी के आरोपों ने नई बहस छेड़ दी है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे के आरोपों के बाद अब सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष और विधायक सदा सरवणकर ने पूरे मामले पर विस्तृत सफाई दी है। उन्होंने कहा कि मंदिर में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई की गई थी और जिन कर्मचारियों को हिरासत में लिया गया था, उन्हें न्यायिक प्रक्रिया के बाद अदालत से जमानत मिल चुकी है।

सदा सरवणकर ने कहा कि सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट प्रशासन पारदर्शिता के साथ काम करता है और दान राशि के प्रबंधन को लेकर सभी आवश्यक नियमों का पालन किया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस मामले का जिक्र किया जा रहा है, उसमें आठ कर्मचारियों को जांच के दौरान पुलिस ने हिरासत में लिया था। इन कर्मचारियों ने पहले पुलिस कस्टडी और बाद में न्यायिक हिरासत का सामना किया, जिसके बाद सक्षम अदालत ने उन्हें जमानत प्रदान की।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति को जमानत मिलना न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है और इससे जांच प्रभावित नहीं होती। यदि किसी मामले में जांच एजेंसियों को आगे भी कोई साक्ष्य मिलते हैं, तो वे कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकती हैं।

यह विवाद तब सामने आया जब राज ठाकरे ने एक सार्वजनिक कार्यक्रम में मंदिरों में मिलने वाले दान के प्रबंधन पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर में हर वर्ष लगभग 18 करोड़ रुपये के दान में गड़बड़ी होती है। इसके साथ ही उन्होंने अयोध्या के राम मंदिर का भी उल्लेख करते हुए दावा किया कि वहां करीब 1400 करोड़ रुपये के दान में अनियमितताओं की बात सामने आई है। हालांकि, उन्होंने अपने आरोपों के समर्थन में कोई सार्वजनिक दस्तावेज या आधिकारिक रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की।

राज ठाकरे के इन बयानों के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई। कई लोगों ने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की, जबकि कुछ नेताओं ने इसे बिना पर्याप्त प्रमाण के लगाया गया गंभीर आरोप बताया। इस बीच सिद्धिविनायक ट्रस्ट की ओर से जारी सफाई को मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया माना जा रहा है।

सदा सरवणकर ने कहा कि सिद्धिविनायक मंदिर देश के सबसे प्रतिष्ठित और श्रद्धालुओं की आस्था के प्रमुख केंद्रों में शामिल है। यहां आने वाली दान राशि का उपयोग धार्मिक गतिविधियों के साथ-साथ सामाजिक और जनकल्याणकारी कार्यों में भी किया जाता है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन का नियमित ऑडिट होता है और सभी प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों के अनुरूप संचालित की जाती हैं।

उन्होंने लोगों से अपील की कि मंदिर और उसकी व्यवस्थाओं को लेकर किसी भी प्रकार की अफवाह या अपुष्ट जानकारी पर भरोसा न करें। उनका कहना था कि यदि किसी को किसी प्रकार की शिकायत या संदेह है, तो उसके लिए कानूनी और प्रशासनिक व्यवस्था मौजूद है, जहां तथ्यों के आधार पर जांच कराई जा सकती है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर धार्मिक संस्थानों में दान राशि के प्रबंधन और उसकी पारदर्शिता को लेकर चर्चा को तेज कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े धार्मिक ट्रस्टों में वित्तीय प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी बनाने और समय-समय पर सार्वजनिक जानकारी उपलब्ध कराने से इस तरह के विवादों की संभावना कम हो सकती है।

फिलहाल, सिद्धिविनायक ट्रस्ट ने अपने स्तर पर सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के तहत जो भी कार्रवाई हुई, वह पूरी तरह कानून के अनुसार की गई। वहीं, राज ठाकरे के आरोपों और ट्रस्ट की सफाई के बाद यह मुद्दा राजनीतिक और सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बना हुआ है।

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