मुंबई। उमस और भीषण गर्मी से बेहाल मुंबईकरों के लिए आखिरकार वो सुखद पल आ ही गया, जिसका उन्हें बेसब्री से इंतजार था। दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 13 दिनों की देरी के बाद मंगलवार (23 जून) को मायानगरी मुंबई में अपनी आनंदपूर्ण उपस्थिति दर्ज करा दी है। सुबह की शुरुआत कड़कड़ाती बिजली, बादलों की गड़गड़ाहट और झमाझम बौछारों के साथ हुई, जिसने पूरे शहर को एक नई ताजगी और सुकून से सराबोर कर दिया।
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, मानसून अब मुंबई सहित महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों, ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार में तेजी से आगे बढ़ चुका है। इसके साथ ही आज दिल्ली और उत्तर प्रदेश (UP) में भी भारी बारिश और आंधी का ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया गया है।
मुंबई में मानसून के पहुंचने की सामान्य और आधिकारिक तारीख 10 जून मानी जाती है। लेकिन इतिहास गवाह है कि मानसून का मिजाज हमेशा बदलता रहा है:
सबसे जल्दी (2025): पिछले साल मानसून ने पिछले 75 सालों का रिकॉर्ड तोड़ते हुए बेहद जल्दी यानी 26 मई को ही दस्तक दे दी थी।
सबसे देरी से (2019 और 2023): इन सालों में मानसून सबसे ज्यादा लेट होकर 25 जून को मुंबई पहुंचा था।
इस साल का संयोग: इस बार मानसून 23 जून को आया है। ठीक ऐसा ही संयोग साल 1981 में भी बना था जब मानसून ठीक इसी तारीख (23 जून) को आया था। वैसे इतिहास की सबसे लंबी देरी 1958 और 1974 में दर्ज की गई थी, जब मानसून 28 जून को आया था।
मानसून की इस पहली भारी बारिश के बावजूद राहत की बात यह रही कि मुंबई थमी नहीं। मुख्य सड़कों पर ट्रैफिक की रफ्तार जरूर थोड़ी धीमी हुई, लेकिन सभी प्रमुख सब-वे पूरी तरह खुले रहे।
लोकल और बसें सामान्य: मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनें और ‘बेस्ट’ (BEST) बसें सामान्य रूप से दौड़ती रहीं।
कहाँ हुई सबसे ज्यादा बारिश?: शाम 7 बजे तक मध्य मुंबई के नायर अस्पताल क्षेत्र में सबसे ज्यादा 78.96 मिमी बारिश दर्ज की गई।
झीलों का जलस्तर सुधरा: मुंबई को पानी सप्लाई करने वाली झीलों के जलग्रहण क्षेत्रों में औसतन 89 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जिसमें मध्य वैतरणा में सबसे ज्यादा 55 मिमी पानी बरसा। वहीं, मीठी नदी का जलस्तर भी 0.47 मीटर के साथ फिलहाल पूरी तरह सामान्य और सुरक्षित बना हुआ है।