जम्मू : पवित्र अमरनाथ यात्रा से जुड़ी एक बड़ी और हैरान करने वाली खबर सामने आई है। अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक बर्फ का शिवलिंग लगभग पूरी तरह पिघल चुका है। जबकि इस साल 57 दिनों तक चलने वाली यह यात्रा अभी महज 5 दिन पहले ही शुरू हुई थी।
अमरनाथ यात्रा इस साल 3 जुलाई से शुरू हुई थी और यह 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन समाप्त होगी। यात्रा के शुरुआती चार दिनों में ही करीब 86 हजार श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा के दर्शन कर लिए थे। अधिकारियों के मुताबिक, मंगलवार (पांचवें दिन) तक दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का कुल आंकड़ा 1 लाख के पार पहुंच चुका है। इस साल यात्रा के लिए लगभग 4 लाख श्रद्धालुओं ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया है, जिसका मतलब है कि अभी भी 3 लाख से ज्यादा भक्तों को बाबा बर्फानी के दर्शन करना बाकी है।
प्राकृतिक तौर पर बनने वाले इस हिमलिंग के आकार में तेजी से बदलाव आया है:
23 मई: सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों द्वारा जारी तस्वीरों में शिवलिंग की ऊंचाई करीब 7 फीट दर्ज की गई थी।
29 जून: यात्रा शुरू होने से ठीक पहले पहली पूजा के दिन भी हिमलिंग का आकार 5 फीट से अधिक था।
6 जुलाई: सामने आई ताजा तस्वीरों और रिपोर्ट के अनुसार, हिमलिंग अपने आकार का लगभग 90% से ज्यादा हिस्सा खो चुका है और गुफा में बर्फ लगभग न के बराबर बची है।
इस बार पारंपरिक 48 किलोमीटर लंबे नुनवान-पहलगाम रूट और 14 किलोमीटर लंबे छोटे लेकिन कठिन बालटाल रूट से खराब मौसम और बारिश के बीच भी लगातार यात्री पवित्र गुफा की ओर बढ़ रहे हैं। मंगलवार को बारिश के कारण कई श्रद्धालु रेनकोट पहने हुए नजर आए।
अमरनाथ का हिम शिवलिंग किसी कृत्रिम तरीके या बर्फ के टुकड़ों को तराशकर नहीं बनाया जाता, बल्कि यह पूरी तरह एक प्राकृतिक आइस स्टैलेग्माइट (Ice Stalagmite) होता है। जिस प्रकार प्राकृतिक गुफाओं में पानी के टपकने और खनिजों के जमने से संरचनाएं बनती हैं, उसी तरह अमरनाथ गुफा की छत से रिसने वाला पानी नीचे गिरकर जमकर बर्फ का शिवलिंग आकार लेता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इन प्राकृतिक हिमलिंगों का आकार और अस्तित्व पूरी तरह से स्थानीय मौसम, तापमान में उतार-चढ़ाव और पानी के रिसाव पर निर्भर करता है, जिसके कारण हर साल इनका आकार अलग-अलग और अनिश्चित रहता है।