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भारत का साथ निभा रहा इजरायल, नेतन्याहू के बयान से बढ़ी चर्चा

यरुशलम/वॉशिंगटन। अमेरिका और इजरायल के बीच हाल के दिनों में कुछ अहम रणनीतिक मुद्दों को लेकर सामने आई मतभिन्नताओं के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का भारत को लेकर दिया गया बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। नेतन्याहू ने एक इंटरव्यू में कहा कि इजरायल केवल अमेरिका पर निर्भर नहीं […]

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  • July 10, 2026 10:00 am IST, Published 2 hours ago

यरुशलम/वॉशिंगटन। अमेरिका और इजरायल के बीच हाल के दिनों में कुछ अहम रणनीतिक मुद्दों को लेकर सामने आई मतभिन्नताओं के बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का भारत को लेकर दिया गया बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। नेतन्याहू ने एक इंटरव्यू में कहा कि इजरायल केवल अमेरिका पर निर्भर नहीं है, बल्कि वह दुनिया के अन्य महत्वपूर्ण देशों के साथ भी अपने संबंध मजबूत कर रहा है। इस संदर्भ में उन्होंने भारत का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि इजरायल इस समय भारत के साथ नए रणनीतिक रिश्तों को आगे बढ़ा रहा है।

नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और इजरायल के बीच ईरान नीति को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण दिखाई दे रहे हैं। माना जा रहा है कि हालिया घटनाक्रम के बाद दोनों देशों के रिश्तों में कुछ तनाव देखने को मिला है। ऐसे माहौल में भारत का उल्लेख कर नेतन्याहू ने यह संकेत देने की कोशिश की कि इजरायल अपनी विदेश नीति में बहुपक्षीय साझेदारियों को भी समान महत्व दे रहा है।

भारत का किया विशेष उल्लेख

फर्स्टपोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक इंटरव्यू में कहा कि भविष्य की वैश्विक राजनीति में नए गठबंधन बनेंगे और नए मित्र देशों के साथ सहयोग बढ़ेगा। इसी संदर्भ में उन्होंने भारत का नाम लेते हुए कहा कि इजरायल इस दिशा में भारत के साथ भी सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

नेतन्याहू ने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में केवल पारंपरिक सहयोगियों पर निर्भर रहने के बजाय विभिन्न लोकतांत्रिक और उभरती शक्तियों के साथ संबंध मजबूत करना आवश्यक है। भारत और इजरायल के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन, साइबर सुरक्षा, तकनीक और व्यापार जैसे क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ा है।

अमेरिका-इजरायल संबंधों में क्यों आई चर्चा?

हाल के महीनों में ईरान को लेकर अमेरिका और इजरायल की रणनीति में कुछ अंतर देखने को मिला। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने कूटनीतिक समाधान और तनाव कम करने पर जोर दिया, जबकि इजरायल ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों को लेकर अधिक सख्त रुख अपनाने की बात करता रहा है।

इसी दौरान अमेरिकी नेतृत्व की ओर से दिए गए कुछ सार्वजनिक बयानों ने भी दोनों देशों के बीच मतभेदों की चर्चाओं को हवा दी। हालांकि दोनों देशों ने आधिकारिक तौर पर अपने रणनीतिक संबंधों को मजबूत बताया है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि कुछ मुद्दों पर दृष्टिकोण अलग-अलग हो सकते हैं।

जेडी वेंस की टिप्पणी पर भी दिया जवाब

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की एक टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल के पास अमेरिका के अलावा भी कई भरोसेमंद मित्र देश हैं। इसी क्रम में उन्होंने भारत का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत जैसा विशाल लोकतांत्रिक देश इजरायल का महत्वपूर्ण साझेदार है और दोनों देशों के बीच गहरा सहयोग मौजूद है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत की बड़ी आबादी, मजबूत अर्थव्यवस्था और वैश्विक प्रभाव उसे विश्व राजनीति में एक महत्वपूर्ण शक्ति बनाते हैं। ऐसे में भारत के साथ रणनीतिक संबंध दोनों देशों के लिए लाभकारी हैं।

भारत-इजरायल संबंध लगातार हो रहे मजबूत

भारत और इजरायल के बीच पिछले एक दशक में द्विपक्षीय संबंधों में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। रक्षा सहयोग के अलावा दोनों देश कृषि तकनीक, जल संरक्षण, स्टार्टअप, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में भी साझेदारी बढ़ा रहे हैं।

भारत इजरायल से रक्षा उपकरण, आधुनिक तकनीक और कृषि नवाचार प्राप्त करता है, जबकि इजरायल भारत को एक विश्वसनीय और तेजी से उभरते रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है। दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय राजनीतिक यात्राओं और समझौतों ने भी संबंधों को नई ऊंचाई दी है।

विशेषज्ञों की राय

विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि नेतन्याहू का यह बयान केवल भारत की प्रशंसा नहीं बल्कि बदलती वैश्विक कूटनीति का संकेत भी है। आज की दुनिया में देश एक ही शक्ति केंद्र पर निर्भर रहने के बजाय बहुस्तरीय साझेदारियों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के तहत अमेरिका, इजरायल, यूरोप, रूस और पश्चिम एशिया के देशों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की रणनीति अपनाता रहा है। ऐसे में इजरायल द्वारा भारत का सार्वजनिक रूप से उल्लेख करना दोनों देशों के मजबूत होते संबंधों को दर्शाता है।

क्या हैं इसके कूटनीतिक मायने?

विश्लेषकों के अनुसार, नेतन्याहू का बयान यह संदेश देता है कि इजरायल भविष्य में एशिया के प्रमुख देशों, विशेषकर भारत, के साथ अपने रणनीतिक सहयोग को और मजबूत करना चाहता है। भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका, आर्थिक विकास और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते प्रभाव को देखते हुए इजरायल भारत को एक दीर्घकालिक साझेदार के रूप में देख रहा है।

हालांकि अमेरिका और इजरायल के संबंध अभी भी बेहद मजबूत माने जाते हैं, लेकिन वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बदलने के साथ विभिन्न देशों के बीच नए सहयोग और रणनीतिक साझेदारियां भी तेजी से विकसित हो रही हैं। ऐसे में नेतन्याहू का भारत को लेकर दिया गया बयान अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

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