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शिक्षाविद और पूर्व राज्यपाल डॉ. डी.वाई. पाटिल का 90 वर्ष में निधन

कोल्हापुर: देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविद, पूर्व राज्यपाल और पद्मश्री सम्मान से अलंकृत डॉ. ज्ञानदेव यशवंतराव पाटिल (डॉ. डी.वाई. पाटिल) का 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे और कोल्हापुर में उनका उपचार चल रहा था। उनके निधन से महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि देशभर के शैक्षणिक, सामाजिक और राजनीतिक […]

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  • August 4, 2026 3:35 pm IST, Published 2 hours ago

कोल्हापुर: देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविद, पूर्व राज्यपाल और पद्मश्री सम्मान से अलंकृत डॉ. ज्ञानदेव यशवंतराव पाटिल (डॉ. डी.वाई. पाटिल) का 90 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे और कोल्हापुर में उनका उपचार चल रहा था। उनके निधन से महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि देशभर के शैक्षणिक, सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई है। उन्होंने शिक्षा, समाजसेवा और सार्वजनिक जीवन में जो योगदान दिया, उसे लंबे समय तक याद किया जाएगा।

डॉ. डी.वाई. पाटिल का जीवन संघर्ष, संकल्प और सफलता की प्रेरणादायक कहानी माना जाता है। कोल्हापुर जिले के अंबाप गांव में 22 अक्टूबर 1935 को एक साधारण किसान परिवार में जन्मे पाटिल ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को साकार किया। उन्होंने शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम माना और इसी सोच के साथ अपने जीवन का बड़ा हिस्सा शैक्षणिक संस्थानों के निर्माण और विस्तार में समर्पित किया।

राजनीतिक जीवन की शुरुआत उन्होंने स्थानीय निकाय से की। वर्ष 1957 से 1962 तक वे कोल्हापुर शहर के महापौर रहे। इसके बाद उन्होंने विधानसभा चुनावों में हिस्सा लिया और कांग्रेस के टिकट पर पन्हाला विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक चुने गए। सार्वजनिक जीवन में उनकी पहचान एक सरल, व्यवहारिक और विकासोन्मुख नेता की रही।

बाद में उन्हें संवैधानिक जिम्मेदारियां भी मिलीं। उन्होंने त्रिपुरा और बिहार के राज्यपाल के रूप में कार्य किया तथा पश्चिम बंगाल के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला। अपने कार्यकाल में उन्होंने प्रशासनिक पारदर्शिता, शिक्षा और सामाजिक विकास को विशेष प्राथमिकता दी। उनकी कार्यशैली संतुलित और जनहित केंद्रित मानी जाती थी।

हालांकि, उनकी सबसे बड़ी पहचान शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों से बनी। वर्ष 1983 में उन्होंने नवी मुंबई में रामराव आदिक इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (RAIT) की स्थापना की। इसके बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नए संस्थानों की शुरुआत की। समय के साथ डी.वाई. पाटिल समूह देश के प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों में शामिल हो गया।

आज इस समूह के अंतर्गत मेडिकल, डेंटल, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, नर्सिंग, फार्मेसी, आर्किटेक्चर और स्कूल शिक्षा से जुड़े 150 से अधिक संस्थान संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा कई डिम्ड और निजी विश्वविद्यालय भी इस समूह का हिस्सा हैं। इन संस्थानों से देश और विदेश के लाखों विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं।

डॉ. पाटिल का मानना था कि केवल डिग्री देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करना आवश्यक है जो समाज और देश के विकास में सकारात्मक भूमिका निभाएं। इसी सोच के कारण उन्होंने आधुनिक सुविधाओं, अनुसंधान और व्यावसायिक शिक्षा पर विशेष जोर दिया। उनके संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ खेल, शोध और नवाचार को भी समान महत्व दिया गया।

शिक्षा और समाज सेवा में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया था। यह सम्मान उनके दशकों लंबे समर्पण और समाज निर्माण में निभाई गई भूमिका का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान था।

उनके निधन के बाद अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव शरीर को 5 अगस्त को कोल्हापुर के कसबा बावड़ा स्थित यशवंत निवास में रखा जाएगा। इसके बाद अंतिम यात्रा निकाली जाएगी और डी.वाई. पाटिल मेडिकल कॉलेज परिसर में पूरे राजकीय सम्मान और पारिवारिक परंपराओं के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

 

 

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