आजम खान की गिरफ्तारी का घटनाक्रम भी काफी चर्चा में रहा। दरअसल, दो पैन कार्ड से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हुआ था। 31 अक्टूबर की शाम दोनों की रिहाई होनी थी। हालांकि, आजम खान जैसे ही रामपुर जेल से बाहर आए, ईडी की टीम ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। अचानक हुई इस कार्रवाई से जेल के बाहर मौजूद समर्थकों और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं में नाराजगी देखने को मिली।
ईडी ने आजम खान को जौहर यूनिवर्सिटी से संबंधित मामले में गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि सरकारी धन का इस्तेमाल सार्वजनिक सुविधाओं और आम लोगों के हित में होने वाले विकास कार्यों के बजाय निजी शिक्षण संस्थान मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण में किया गया। इसी मामले में ईडी ने 28 अक्टूबर को विश्वविद्यालय से जुड़ी जमीन और इमारतों को कुर्क करने की कार्रवाई भी की थी।
जांच एजेंसी की कार्रवाई के केंद्र में सरकारी धन के कथित दुरुपयोग का मामला है। आरोप है कि सार्वजनिक मूलभूत सुविधाओं के लिए निर्धारित सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल विश्वविद्यालय के निर्माण और उससे जुड़ी गतिविधियों में किया गया। ईडी इस मामले में वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों से संबंधित पहलुओं की जांच कर रही है। एजेंसी की कार्रवाई के मुताबिक, कुर्क की गई संपत्तियां भी इसी जांच से जुड़ी हुई हैं।
गाजियाबाद की विशेष अदालत में पेशी के दौरान ईडी ने मामले से जुड़े तथ्यों और अपनी जांच के आधार पर कार्रवाई को आगे बढ़ाया। अदालत ने आजम खान को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। इसके बाद उन्हें डासना जेल भेज दिया गया। अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया अदालत के निर्देशों और जांच एजेंसी की कार्रवाई के अनुसार चलेगी।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच आजम खान का बयान भी राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। गिरफ्तारी के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें मुसलमान होने की सजा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि उनका अपराध केवल विश्वविद्यालय बनाना है। उनके बेटे अब्दुल्ला आजम ने भी इसी तरह की बात कही और कार्रवाई पर सवाल उठाए। हालांकि, ये आजम खान और उनके परिवार की ओर से लगाए गए आरोप हैं। मामले में ईडी की जांच और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही आरोपों से जुड़े तथ्यों का निर्धारण होगा।
समाजवादी पार्टी ने भी आजम खान की गिरफ्तारी को लेकर नाराजगी जताई है। पार्टी नेताओं का आरोप है कि यह कार्रवाई राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है और आजम खान को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है। सपा का कहना है कि हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद जेल से बाहर आते ही गिरफ्तारी होना कई सवाल खड़े करता है। पार्टी के वरिष्ठ नेता पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं।
फिलहाल आजम खान को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद यह मामला और महत्वपूर्ण हो गया है। आने वाले दिनों में ईडी की जांच, अदालत की सुनवाई और समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया पर सबकी नजर रहेगी। अब देखना होगा कि जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े आरोपों की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और इसका उत्तर प्रदेश की राजनीति पर क्या असर पड़ता है।