नई दिल्ली। देश में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और सड़कों पर वाहनों की लगातार बढ़ती फौज ने पुरानी परिवहन व्यवस्था की पोल खोल दी है। परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ष 2006 में लागू की गई ‘राष्ट्रीय शहरी परिवहन नीति’ अब पूरी तरह से फेल साबित हो चुकी है। ऐसे में देश की बदलती जरूरतों को देखते हुए एक नई और व्यापक शहरी परिवहन नीति बनाने की मांग तेज हो गई है।
इंडियन स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी (ISPP) ने सोमवार को साल 2006 की राष्ट्रीय शहरी परिवहन नीति की समीक्षा प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा की। ISPP के ‘सेंटर फॉर अर्बन ट्रांजिशन’ (ICUT) द्वारा किए गए शुरुआती अध्ययन में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं:
2006 में वाहनों की संख्या: लगभग 9 करोड़
2025 तक वाहनों की संख्या: 41.3 करोड़ से अधिक
दो दशकों में हुई वृद्धि: करीब 32 करोड़ नए वाहन सड़कों पर उतरे हैं।
वाहनों की इस बेतहाशा वृद्धि के कारण आज भारतीय शहरों की परिवहन व्यवस्था पर भारी दबाव है और ट्रैफिक जाम व प्रदूषण जैसी समस्याएं विकराल रूप ले चुकी हैं।
परिवहन, शहरी विकास और सार्वजनिक नीति से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, 2006 की नीति अपने मुख्य उद्देश्यों को पूरा करने में असफल रही। समीक्षा के प्रारंभिक निष्कर्षों में निम्नलिखित कमियां सामने आई हैं:
पब्लिक ट्रांसपोर्ट को नहीं मिला बढ़ावा: सार्वजनिक परिवहन (Public Transport) और गैर-मोटर चालित साधनों (जैसे साइकिल या पैदल चलना) को बढ़ावा देने का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सका।
मेट्रो परियोजनाओं में तालमेल की कमी: कई शहरों में मेट्रो रेल परियोजनाओं को प्राथमिकता तो दी गई, लेकिन उन्हें समग्र परिवहन नेटवर्क (अन्य बसों या साधनों) और भूमि उपयोग योजनाओं के साथ सही तरीके से नहीं जोड़ा गया।
आधुनिक चुनौतियों की अनदेखी: पुरानी नीति में पार्किंग प्रबंधन, शहरी माल परिवहन, ऐप-आधारित टैक्सी/ऑटो सेवाएं (Ola/Uber), ई-कॉमर्स लॉजिस्टिक्स और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) जैसे गंभीर मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
“भारत में अब तक कोई व्यापक शहरीकरण नीति नहीं रही है। शहरों को लंबे समय तक विकास की प्राथमिकता में पीछे रखा गया। यही कारण है कि 2006 की नीति जिन समस्याओं को हल करने के लिए बनाई गई थी, उनमें से कई समस्याएं आज और अधिक गंभीर हो गई हैं।”
— डॉ. पार्थ शाह (डीन और सह-संस्थापक, ISPP)
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि छोटे शहरों की आवाजाही संबंधी आवश्यकताओं और बदलते दौर की तकनीकों को ध्यान में नहीं रखा गया, तो आने वाले समय में स्थिति और बदतर हो जाएगी। इसी को देखते हुए रिपोर्ट में सरकार से सिफारिश की गई है कि वर्ष 2026 में एक नई और आधुनिक शहरी परिवहन नीति को तत्काल लागू किया जाए।