• होम
  • दुनिया
  • फिनलैंड में जयशंकर ने खोली पश्चिम की पोल

फिनलैंड में जयशंकर ने खोली पश्चिम की पोल

फिनलैंड में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर पश्चिमी देशों के रवैये को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद वैश्विक ऊर्जा संकट के दौर में भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • June 12, 2026 3:21 pm IST, Published 3 hours ago

फिनलैंड में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रूस से तेल खरीदने के मुद्दे पर पश्चिमी देशों के रवैये को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद वैश्विक ऊर्जा संकट के दौर में भारत ने अपने राष्ट्रीय हितों और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए फैसले लिए थे, लेकिन अब उन्हीं फैसलों पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

जयशंकर ने कहा कि वर्ष 2022 में जब रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ, तब वैश्विक तेल बाजार में भारी अनिश्चितता थी। उस समय दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती ऊर्जा आपूर्ति को बनाए रखने और कीमतों को नियंत्रण में रखने की थी। उनके अनुसार, उस दौर में खुद अमेरिका भी वैश्विक तेल बाजार को स्थिर बनाए रखने की जरूरत पर जोर दे रहा था, ताकि ऊर्जा संकट और अधिक न बढ़े।

विदेश मंत्री ने कहा कि भारत एक बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता देश है और उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी अपने नागरिकों तथा अर्थव्यवस्था की जरूरतों को पूरा करना है। ऐसे में भारत ने उपलब्ध विकल्पों का आकलन करते हुए रूसी तेल खरीदने का निर्णय लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला किसी राजनीतिक झुकाव के कारण नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक आवश्यकताओं के आधार पर लिया गया था।

जयशंकर ने अपने संबोधन में अमेरिका की प्रतिबंध नीति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कई बार देश अपने हितों के अनुसार फैसले लेते हैं। कभी प्रतिबंध लगाए जाते हैं तो कभी उन्हें वापस भी लिया जाता है। ऐसे में रूस से तेल खरीदने जैसे मुद्दों को केवल नैतिकता के आधार पर देखना उचित नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों को समझते हुए हर देश को अपनी जरूरतों और हितों के अनुरूप निर्णय लेने का अधिकार है। भारत ने भी वही किया जो उसकी ऊर्जा और आर्थिक सुरक्षा के लिए जरूरी था।

अपने संबोधन के अंत में विदेश मंत्री ने दोहराया कि भारत की विदेश नीति और आर्थिक फैसलों का आधार राष्ट्रीय हित है। उन्होंने कहा कि भारत ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और अपने नागरिकों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देता रहेगा। वैश्विक मंचों पर भारत का रुख स्पष्ट है कि वह स्वतंत्र निर्णय लेने में सक्षम है और अपने हितों की रक्षा के लिए व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाता रहेगा।

 

Advertisement