मनाली-लेह मार्ग पर 3 नए टनल प्रोजेक्ट्स को केंद्र की मंजूरी

 15,550 करोड़ रुपये की आएगी लागत; लद्दाख के लिए सालभर बहाल रहेगी कनेक्टिविटी मनाली/कुल्लू: लद्दाख और सीमावर्ती क्षेत्रों को हर मौसम में देश के बाकी हिस्सों से जोड़े रखने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। मनाली-लेह सामरिक मार्ग पर 15,550 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से तीन नए टनल (सुरंग) […]

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  • June 12, 2026 6:27 pm IST, Published 3 hours ago

 15,550 करोड़ रुपये की आएगी लागत; लद्दाख के लिए सालभर बहाल रहेगी कनेक्टिविटी

मनाली/कुल्लू: लद्दाख और सीमावर्ती क्षेत्रों को हर मौसम में देश के बाकी हिस्सों से जोड़े रखने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। मनाली-लेह सामरिक मार्ग पर 15,550 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से तीन नए टनल (सुरंग) प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। ये सुरंगें हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के बेहद ऊंचे और दुर्गम दर्रों— बारालाचा, लाचुंगला और तंगलंग ला के नीचे बनाई जाएंगी।

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस परियोजना की घोषणा करते हुए कहा कि इन सुरंगों के बनने से लद्दाख के लिए सालभर निर्बाध सड़क संपर्क उपलब्ध रहेगा। इससे न केवल आम जनता का सफर आसान होगा, बल्कि चीन और पाकिस्तान सीमाओं पर सेना की आवाजाही और रसद आपूर्ति को भी अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी।

इन 3 प्रमुख दर्रों के नीचे बनेंगी सुरंगें:

  • बारालाचा दर्रा (सुरंग की लंबाई: ~13 किमी): इस टनल के निर्माण पर करीब 8,800 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) अक्टूबर 2026 तक तैयार होने की उम्मीद है।

  • लाचुंगला दर्रा (सुरंग की लंबाई: ~11 किमी): इस सुरंग की अनुमानित लागत 4,500 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसकी DPR दिसंबर 2026 तक पूरी होने की संभावना है।

  • तंगलंग ला दर्रा (सुरंग की लंबाई: ~5 किमी): लद्दाख में स्थित इस दर्रे के नीचे बनने वाली सुरंग पर 2,250 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसकी DPR मार्च 2027 तक तैयार होने की उम्मीद है।

सामरिक और आर्थिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है यह प्रोजेक्ट?

मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित ये तीनों दर्रे अत्यधिक भारी बर्फबारी और खराब मौसम के कारण सर्दियों में कई महीनों तक पूरी तरह बंद हो जाते हैं, जिससे लद्दाख का संपर्क कट जाता है। इन सुरंगों के निर्माण से:

  • सफर होगा 50 किमी कम: ऑल-वेदर कनेक्टिविटी मिलने के साथ-साथ मनाली और लेह के बीच की दूरी लगभग 50 किलोमीटर कम हो जाएगी, जिससे कीमती समय और ईंधन की बड़ी बचत होगी।

  • सेना की त्वरित तैनाती: चीन और पाकिस्तान से लगती सीमाओं पर भारतीय सेना की सामरिक तैयारियां और मजबूत होंगी। भारी सैन्य साजो-सामान और रसद को किसी भी मौसम में तुरंत बॉर्डर तक पहुंचाया जा सकेगा।

  • कनेक्टिविटी का नया नेटवर्क: अटल टनल, जोजिला टनल और प्रस्तावित शिंकुला टनल के बाद यह परियोजना इस पूरे हिमालयी क्षेत्र में कनेक्टिविटी को एक नया आयाम देगी और स्थानीय पर्यटन व अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगी।

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