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महिला स्वतंत्र निदेशक की कमी पर IOC पर 28.39 लाख जुर्माना

नई दिल्ली: इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) के बोर्ड में स्वतंत्र महिला निदेशकों की निर्धारित संख्या पूरी नहीं होने के चलते कंपनी पर कुल 28.39 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह कार्रवाई देश के प्रमुख शेयर बाजारों ने की है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) की ओर से लगाया गया […]

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Gauravshali Bharat News
  • August 27, 2026 10:55 am IST, Published 3 hours ago

नई दिल्ली: इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) के बोर्ड में स्वतंत्र महिला निदेशकों की निर्धारित संख्या पूरी नहीं होने के चलते कंपनी पर कुल 28.39 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। यह कार्रवाई देश के प्रमुख शेयर बाजारों ने की है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) की ओर से लगाया गया यह जुर्माना कंपनी के निदेशक मंडल में लैंगिक प्रतिनिधित्व से जुड़े नियामकीय प्रावधानों के पालन से संबंधित है।

बाजार नियामकों की ओर से सूचीबद्ध कंपनियों के लिए बोर्ड में स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति को लेकर स्पष्ट नियम बनाए गए हैं। इनमें महिला प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने का प्रावधान भी शामिल है। इसका उद्देश्य कंपनियों के शीर्ष प्रबंधन में विविधता बढ़ाने के साथ-साथ निर्णय लेने की प्रक्रिया में अलग-अलग दृष्टिकोणों को शामिल करना है। नियमों के तहत निर्धारित मानकों का पालन नहीं होने पर शेयर बाजार कंपनियों पर आर्थिक दंड लगा सकते हैं।

IOC ने जुर्माने को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि कंपनी के बोर्ड में निदेशकों की नियुक्ति का अधिकार उसके पास पूरी तरह से नहीं है। कंपनी के अनुसार, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की भूमिका इसमें महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि IOC ने दोनों शेयर बाजारों से जुर्माना माफ करने का अनुरोध किया है।

कंपनी का तर्क है कि यदि किसी पद पर नियुक्ति के लिए संबंधित मंत्रालय से मंजूरी या निर्णय आवश्यक है, तो केवल कंपनी को नियमों का उल्लंघन करने के लिए जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। IOC ने इसी आधार पर जुर्माना हटाने या माफ करने की मांग की है। हालांकि, इस अनुरोध पर अंतिम निर्णय संबंधित एक्सचेंजों और नियामकीय व्यवस्था के तहत लिया जाएगा।

यह मामला सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में बोर्ड नियुक्तियों की प्रक्रिया और बाजार नियामकों के नियमों के बीच तालमेल को भी सामने लाता है। निजी क्षेत्र की सूचीबद्ध कंपनियों के मुकाबले सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों में कई महत्वपूर्ण निदेशक पदों पर नियुक्तियां सरकार या संबंधित मंत्रालय के स्तर पर होती हैं। ऐसे में रिक्त पदों और नियामकीय समयसीमा को लेकर कंपनियों के सामने अलग तरह की चुनौतियां सामने आती हैं। बोर्ड में स्वतंत्र महिला निदेशक की मौजूदगी सिर्फ नियमों के अनुपालन तक सीमित नहीं मानी जाती। इसी वजह से नियामकीय संस्थाएं बोर्ड में पर्याप्त विविधता को कॉरपोरेट गवर्नेंस का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती हैं।

IOC देश की सबसे बड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों में शामिल है। ऐसे में उसके बोर्ड से जुड़ा यह मामला सरकारी कंपनियों में निदेशक नियुक्तियों और सूचीबद्धता नियमों के अनुपालन को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कंपनी की ओर से जुर्माना माफ करने की मांग के बाद अब यह देखना होगा कि NSE और BSE इस मामले में क्या निर्णय लेते हैं। फिलहाल 28.39 लाख रुपये का जुर्माना महिला स्वतंत्र निदेशक की कमी से जुड़े अनुपालन मुद्दे को लेकर चर्चा में है।

 

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