रोहतक। अक्सर खरीदारी के दौरान ग्राहक कैरी बैग के लिए लिए जाने वाले 5 या 10 रुपये को मामूली रकम समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन हरियाणा के रोहतक में एक उपभोक्ता ने इसी अतिरिक्त शुल्क के खिलाफ आवाज उठाई और आखिरकार न्याय भी हासिल किया। रोहतक जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में प्रसिद्ध फुटवियर ब्रांड रेडटेप (REDTAPE) को ग्राहक से कैरी बैग के लिए 10 रुपये वसूलने के मामले में फटकार लगाते हुए कुल 8,000 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। यह फैसला उपभोक्ता अधिकारों की दृष्टि से एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।
मामले के अनुसार, रोहतक निवासी एक ग्राहक ने कंपनी के शोरूम से जूते खरीदे थे। खरीदारी के दौरान सामान ले जाने के लिए उसे एक कैरी बैग दिया गया, जिसके बदले बिल में 10 रुपये अतिरिक्त जोड़ दिए गए। ग्राहक ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि जब वह कंपनी का उत्पाद खरीद रहा है तो सामान ले जाने के लिए अलग से शुल्क क्यों लिया जा रहा है। हालांकि शोरूम प्रबंधन ने इसे कंपनी की नीति बताते हुए राशि वसूल ली।
इस घटना के बाद ग्राहक ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में कहा गया कि किसी उत्पाद की खरीदारी के बाद उसे सुरक्षित तरीके से घर तक ले जाने की व्यवस्था विक्रेता की जिम्मेदारी होती है। ऐसे में कैरी बैग के नाम पर अतिरिक्त शुल्क वसूलना अनुचित व्यापारिक व्यवहार है।
सुनवाई के दौरान कंपनी की ओर से दलील दी गई कि कैरी बैग के लिए शुल्क लेना पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने की नीति का हिस्सा है। इससे लोग अनावश्यक रूप से प्लास्टिक या पेपर बैग का उपयोग करने से बचते हैं और अपने साथ बैग लेकर आने के लिए प्रेरित होते हैं। कंपनी ने यह भी कहा कि ग्राहक के पास बैग खरीदने या न खरीदने का विकल्प उपलब्ध था।
हालांकि आयोग ने कंपनी की दलीलों को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया। आयोग ने माना कि जब कोई ग्राहक किसी ब्रांडेड स्टोर से उत्पाद खरीदता है तो उसे सामान ले जाने के लिए आवश्यक पैकेजिंग उपलब्ध कराना विक्रेता की जिम्मेदारी है। विशेष रूप से तब, जब कैरी बैग पर कंपनी का नाम, लोगो और ब्रांडिंग छपी हो। ऐसे बैग ग्राहक के लिए केवल सामान रखने का साधन नहीं होते, बल्कि कंपनी के प्रचार का माध्यम भी बन जाते हैं।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि ग्राहक से ऐसे बैग के लिए अतिरिक्त शुल्क लेना उपभोक्ता हितों के खिलाफ है और इसे अनुचित व्यापारिक व्यवहार माना जा सकता है। आयोग ने कंपनी को ग्राहक के 10 रुपये वापस करने के साथ 4,000 रुपये मानसिक प्रताड़ना और असुविधा के लिए मुआवजा तथा 4,000 रुपये मुकदमेबाजी खर्च के रूप में देने का निर्देश दिया। इस प्रकार कंपनी को कुल 8,000 रुपये का भुगतान करना होगा।
उपभोक्ता अधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला उन लाखों ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण है जो रोजमर्रा की खरीदारी के दौरान अतिरिक्त शुल्क का भुगतान करते हैं, लेकिन उसके खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं कराते। यह निर्णय स्पष्ट संदेश देता है कि उपभोक्ता चाहे कितनी भी छोटी राशि का मामला हो, यदि उसके साथ अनुचित व्यवहार किया गया है तो वह न्याय पाने का अधिकार रखता है।
यह फैसला व्यापारिक प्रतिष्ठानों के लिए भी एक चेतावनी माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों को अपने ग्राहकों के साथ पारदर्शी व्यवहार करना चाहिए और ऐसे शुल्कों से बचना चाहिए जो उपभोक्ताओं पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालते हों। साथ ही, ग्राहकों को भी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए और किसी भी प्रकार की अनुचित वसूली होने पर संबंधित मंचों पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
रोहतक उपभोक्ता आयोग का यह आदेश एक बार फिर साबित करता है कि उपभोक्ता संरक्षण कानून केवल बड़े विवादों के लिए ही नहीं, बल्कि छोटी-छोटी शिकायतों में भी आम नागरिकों को न्याय दिलाने में प्रभावी भूमिका निभा रहा है। यही कारण है कि यह मामला अब उपभोक्ता अधिकारों की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है।