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पंकजा मुंडे पर कांग्रेस की नजर, सीएम पद का दिया बड़ा प्रस्ताव

मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया सियासी मोड़ सामने आया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक विजय वडेट्टीवार ने भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता एवं राज्य की पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे को लेकर बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि पंकजा मुंडे भारतीय जनता पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थामती हैं, […]

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  • August 4, 2026 6:10 pm IST, Published 43 minutes ago

मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया सियासी मोड़ सामने आया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और विधायक विजय वडेट्टीवार ने भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता एवं राज्य की पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे को लेकर बड़ा राजनीतिक बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि पंकजा मुंडे भारतीय जनता पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थामती हैं, तो उनकी पार्टी उन्हें महाराष्ट्र की पहली ओबीसी महिला मुख्यमंत्री बनाने का प्रयास करेगी। यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में पंकजा मुंडे ने सार्वजनिक मंच से अपने राजनीतिक जीवन को लेकर थकान महसूस करने और संन्यास लेने पर विचार करने जैसी बात कही थी।

वडेट्टीवार के इस बयान ने महाराष्ट्र की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं है और न ही उन्हें किसी को पार्टी में शामिल कराने का अधिकार है। उनका कहना था कि यदि पंकजा मुंडे ऐसा कोई फैसला लेती हैं, तो वह कांग्रेस नेतृत्व से उनके पक्ष में आग्रह करेंगे।

कांग्रेस विधायक ने पंकजा मुंडे को ओबीसी समाज का मजबूत चेहरा बताते हुए कहा कि राज्य की राजनीति में ओबीसी नेतृत्व को और मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने अपील करते हुए कहा कि पंकजा को राजनीति से दूरी बनाने के बजाय समाज का नेतृत्व करना चाहिए। उनके अनुसार, यदि वह कांग्रेस में आती हैं तो सहयोगी दलों के साथ मिलकर उन्हें मुख्यमंत्री पद तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास किए जा सकते हैं।

वडेट्टीवार ने इस दौरान भाजपा पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में कई ओबीसी नेताओं को अपेक्षित सम्मान और अवसर नहीं मिल रहा है। उनका कहना था कि समय-समय पर कई नेता पार्टी छोड़ चुके हैं क्योंकि उन्हें लगा कि उनके योगदान का उचित मूल्यांकन नहीं हो रहा। उन्होंने यह भी कहा कि संभव है पंकजा मुंडे की हालिया टिप्पणी भी इसी तरह की निराशा और दबाव का परिणाम हो।

दरअसल, कुछ दिन पहले परली क्षेत्र में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पंकजा मुंडे ने स्थानीय विकास, विशेषकर खराब सड़कों की स्थिति को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था कि वह पिछले कई दशकों से इसी क्षेत्र की जनता के बीच काम कर रही हैं, लेकिन आज भी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है। इसी दौरान उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि वह लंबे समय से संघर्ष कर रही हैं और अब थकान महसूस कर रही हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि कभी-कभी उन्हें संन्यास लेने का विचार भी आता है।

पंकजा मुंडे के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगने लगीं। हालांकि बाद में स्पष्ट हुआ कि उन्होंने न तो भाजपा छोड़ने की बात कही थी और न ही सक्रिय राजनीति से तत्काल संन्यास लेने का कोई औपचारिक संकेत दिया था। उनका बयान मुख्य रूप से विकास कार्यों में आ रही चुनौतियों और व्यक्तिगत थकान को लेकर था।

विजय वडेट्टीवार का बयान केवल राजनीतिक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि ओबीसी नेतृत्व को लेकर कांग्रेस की रणनीति का भी संकेत हो सकता है। महाराष्ट्र की राजनीति में ओबीसी समुदाय का प्रभाव महत्वपूर्ण माना जाता है और विभिन्न दल लगातार इस वर्ग को अपने साथ जोड़ने की कोशिश करते रहे हैं।

फिलहाल पंकजा मुंडे की ओर से कांग्रेस के इस प्रस्ताव पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। भाजपा की तरफ से भी इस बयान पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में यह बयान केवल राजनीतिक चर्चा तक सीमित रहता है या महाराष्ट्र की राजनीति में कोई नया समीकरण बनता है।

एक बात स्पष्ट है कि पंकजा मुंडे की लोकप्रियता और उनके हालिया बयान ने विपक्ष को राजनीतिक अवसर जरूर दिया है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पंकजा आगे क्या रुख अपनाती हैं और भाजपा इस पूरे घटनाक्रम को किस तरह संभालती है।

 

 

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