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राजस्थान में सार्वजनिक परिवहन का नया अध्याय, ई-बसों का जाल बिछेगा

राजस्थान में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत नई इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस पहल का उद्देश्य शहरों में स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधाजनक यातायात व्यवस्था को बढ़ावा देना है, साथ ही […]

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  • June 20, 2026 6:00 pm IST, Published 1 hour ago

राजस्थान में सार्वजनिक परिवहन को आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत नई इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस पहल का उद्देश्य शहरों में स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधाजनक यातायात व्यवस्था को बढ़ावा देना है, साथ ही बढ़ते प्रदूषण पर भी नियंत्रण पाना है।

कार्यक्रम के दौरान जयपुर में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत की गई, जबकि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भीलवाड़ा में भी नई ई-बस सेवाओं का शुभारंभ हुआ। सरकार का मानना है कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने से न केवल परिवहन व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को भी गति मिलेगी।

प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत राजस्थान के आठ प्रमुख शहरों—जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर, भीलवाड़ा, अलवर और अजमेर—का चयन किया गया है। इन शहरों के लिए केंद्र सरकार द्वारा सैकड़ों इलेक्ट्रिक बसों को मंजूरी दी गई है। अतिरिक्त स्वीकृतियों के साथ प्रदेश को कुल 1150 से अधिक ई-बसों का लाभ मिलने जा रहा है। सरकार की योजना है कि पहले चरण में बड़ी संख्या में बसों को सड़कों पर उतारकर लोगों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराया जाए।

नई इलेक्ट्रिक बसों में यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है। बसों में सीसीटीवी कैमरे, पैनिक बटन, एयर कंडीशनिंग और दिव्यांगजन अनुकूल सुविधाएं उपलब्ध होंगी। महिलाओं, विद्यार्थियों, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग यात्रियों के लिए यह सेवा अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक मानी जा रही है।

राज्य सरकार का लक्ष्य केवल शहरी परिवहन को मजबूत करना ही नहीं, बल्कि पर्यटन क्षेत्र को भी नई ऊर्जा देना है। इसी दिशा में पर्यटकों के लिए डबल डेकर इलेक्ट्रिक बसों को भी शामिल करने की योजना बनाई गई है, जिससे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल यात्रा का अनुभव मिल सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि इलेक्ट्रिक बसों के बढ़ते उपयोग से डीजल आधारित परिवहन पर निर्भरता कम होगी, ईंधन खर्च में बचत होगी और कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी। यह पहल राजस्थान को हरित और टिकाऊ विकास की दिशा में आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है।

सरकार का कहना है कि परिवहन, ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर चलने वाली ऐसी योजनाएं विकसित राजस्थान के लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभाएंगी। आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक परिवहन का विस्तार राज्य के शहरी जीवन को अधिक सुविधाजनक, स्वच्छ और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

 

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