जयपुर। राजस्थान विश्वविद्यालय में परीक्षा व्यवस्था से जुड़ी एक ऐसी चूक सामने आई है, जिसने न केवल छात्रों को हैरान कर दिया बल्कि पूरे शिक्षा जगत में चर्चा छेड़ दी है। विश्वविद्यालय के पीजी स्कूल ऑफ ह्यूमैनिटीज में आयोजित एमए समाजशास्त्र (द्वितीय सेमेस्टर) की परीक्षा उस समय अचानक रोकनी पड़ी, जब विद्यार्थियों को वितरित किए गए प्रश्नपत्र में सवालों की जगह पहले से लिखे हुए उत्तर दिखाई दिए। घटना के सामने आते ही परीक्षा कक्षों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और विश्वविद्यालय प्रशासन को तत्काल परीक्षा रद्द करने का फैसला लेना पड़ा।
जानकारी के अनुसार, मंगलवार को निर्धारित समय पर परीक्षा शुरू हुई थी। छात्र जैसे ही प्रश्नपत्र पढ़ने लगे, उन्हें उसमें गंभीर त्रुटि दिखाई दी। आरोप है कि प्रश्नपत्र में कई स्थानों पर प्रश्नों के बजाय सीधे उनके उत्तर और व्याख्याएं लिखी हुई थीं। छात्रों ने तुरंत इसकी शिकायत परीक्षा केंद्र पर मौजूद अधिकारियों और शिक्षकों से की। शिकायतों की पुष्टि होने के बाद परीक्षा को बीच में ही रोक दिया गया।
इस घटना ने विश्वविद्यालय की प्रश्नपत्र निर्माण और जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक स्तर पर यह चर्चा सामने आई कि प्रश्नपत्र तैयार करने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीक का उपयोग किया गया था। माना जा रहा है कि तकनीकी त्रुटि या दस्तावेज की उचित जांच न होने के कारण अंतिम प्रश्नपत्र में उत्तर भी शामिल हो गए। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने अभी तक आधिकारिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया है कि गलती तकनीकी थी या मानवीय, लेकिन मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
घटना के बाद छात्रों में भारी नाराजगी देखी गई। विद्यार्थियों का कहना है कि परीक्षा की तैयारी के लिए उन्होंने लंबे समय तक मेहनत की थी, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के कारण उन्हें मानसिक तनाव और असुविधा का सामना करना पड़ा। कई छात्रों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मजबूत व्यवस्था विकसित करनी चाहिए।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित परीक्षा को निरस्त कर दिया है। साथ ही छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए परीक्षा की नई तिथि भी घोषित कर दी गई है। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद जिम्मेदार व्यक्तियों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि AI तकनीक शिक्षा क्षेत्र में कई सकारात्मक बदलाव ला सकती है, लेकिन बिना मानवीय निगरानी के इसका उपयोग गंभीर समस्याएं पैदा कर सकता है। विशेषज्ञों ने कहा कि प्रश्नपत्र जैसे संवेदनशील दस्तावेजों को अंतिम रूप देने से पहले कई स्तरों पर सत्यापन और गुणवत्ता परीक्षण अनिवार्य होना चाहिए।
राजस्थान विश्वविद्यालय की यह घटना देशभर के शैक्षणिक संस्थानों के लिए एक चेतावनी के रूप में देखी जा रही है। डिजिटल और AI आधारित प्रणालियों के बढ़ते उपयोग के बीच यह मामला याद दिलाता है कि तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो, अंतिम जिम्मेदारी और निगरानी मानव स्तर पर ही सुनिश्चित करनी होगी। फिलहाल सभी की नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि आखिर इतनी बड़ी चूक कैसे हुई।