नयी दिल्लीः करीब 2.60 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी से जुड़े चर्चित मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की विशेष अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने इंडियन ओवरसीज बैंक के एक पूर्व शाखा प्रबंधक सहित दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दोनों पर एक करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक दंड भी लगाया गया है।
अदालती फैसले के अनुसार, पूर्व शाखा प्रबंधक नीरज कुमार जैन और केतन कुमार पटेल को बैंक के साथ धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े आरोपों में दोषी पाया गया। अदालत ने दोनों को तीन साल की कठोर कैद की सजा सुनाई और उन पर कुल 1.12 करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना भी लगाया।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों, गवाहों के बयान और जांच एजेंसी द्वारा पेश किए गए प्रमाणों का विस्तृत परीक्षण किया। इसके आधार पर दोनों आरोपियों की भूमिका को अपराध में महत्वपूर्ण मानते हुए उन्हें दोषी करार दिया गया।
वहीं, इस मामले में शामिल एक अन्य आरोपी को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया। जबकि एक अन्य आरोपी अभी भी फरार है और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है। जांच एजेंसियां उसकी गिरफ्तारी के प्रयास कर रही हैं।
यह मामला बैंकिंग क्षेत्र में वित्तीय पारदर्शिता, जवाबदेही और धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में अदालतों के सख्त फैसले बैंकिंग प्रणाली में विश्वास बनाए रखने और आर्थिक अपराधों पर नियंत्रण के लिए आवश्यक हैं।
CBI ने इस मामले की जांच के दौरान बैंक रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और संबंधित दस्तावेजों की जांच कर आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। लंबे समय तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद अब विशेष अदालत ने अपना फैसला सुनाया है।