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संजय जोशी ने क्यों कहा, राजनीति से बड़ा है समाजसेवा का काम?

भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री ने सामाजिक संगठनों और कार्यकर्ताओं से मुलाकात में दिया सेवा, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश

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Gauravshali Bharat News
  • November 1, 2026 7:30 pm IST, Published 43 minutes ago

नई दिल्ली। राजनीति को अक्सर सत्ता, पद और चुनावी गतिविधियों से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन समाज के वास्तविक विकास में सामाजिक कार्यों की भूमिका कहीं अधिक व्यापक होती है। समाज के जरूरतमंद लोगों की सहायता करना, युवाओं को अच्छे संस्कार देना, सामाजिक कुरीतियों को दूर करना और लोगों को सकारात्मक दिशा दिखाना ऐसे कार्य हैं, जिनका प्रभाव लंबे समय तक दिखाई देता है। इसी विचार को प्रमुखता देते हुए भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री संजय जोशी ने कहा कि राजनीति से बड़ा काम समाजसेवा करना है। उनका मानना है कि राजनीति में सक्रिय होना आसान हो सकता है, लेकिन निस्वार्थ भाव से समाज के लिए लगातार काम करना हर किसी के बस की बात नहीं है।

सामाजिक सरोकारों से जुड़े इस विचार को उन्होंने दिल्ली के मंगोलपुरी क्षेत्र में भाजपा कार्यकर्ताओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ मुलाकात के दौरान व्यक्त किया। संजय जोशी यहां आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में शामिल होने पहुंचे थे। इस अवसर पर उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ताओं से बातचीत की और समाज के विकास में उनकी भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपना समय और ऊर्जा समाज की भलाई के लिए समर्पित करता है, समाज में उसका अलग स्थान बनता है। ऐसे व्यक्ति को लोगों का सम्मान और विश्वास दोनों प्राप्त होते हैं।

समाजसेवा से बनती है व्यक्ति की असली पहचान

संजय जोशी ने अपने संबोधन में सामाजिक कार्यों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की वास्तविक सफलता केवल उसके पद, प्रतिष्ठा या राजनीतिक प्रभाव से तय नहीं होती, बल्कि यह भी देखा जाना चाहिए कि उसने समाज के लिए क्या योगदान दिया है। समाज के बीच रहकर जरूरतमंद लोगों की मदद करना, उनकी समस्याओं को समझना और समाधान के लिए प्रयास करना ही किसी व्यक्ति को वास्तविक सम्मान दिलाता है।

उन्होंने कहा कि सामाजिक कार्य करने वाला व्यक्ति केवल किसी एक वर्ग या समुदाय के लिए नहीं, बल्कि पूरे समाज के हित में काम करता है। ऐसे प्रयासों से लोगों के बीच आपसी सहयोग, विश्वास और भाईचारे की भावना मजबूत होती है। समाज में जब कोई व्यक्ति बिना किसी स्वार्थ के दूसरों की सहायता करता है तो उसकी पहचान अपने आप बनती है।

उनके अनुसार, राजनीति में लोग अलग-अलग उद्देश्यों के साथ आते हैं, लेकिन सामाजिक सेवा का मूल उद्देश्य मानवता और जनकल्याण होना चाहिए। समाज को आगे बढ़ाने के लिए ऐसे लोगों की आवश्यकता है, जो व्यक्तिगत लाभ से ऊपर उठकर सामूहिक हित को प्राथमिकता दें।

सामाजिक संगठनों को दिया सहयोग का भरोसा

मंगोलपुरी में आयोजित मुलाकात के दौरान संजय जोशी ने सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों और भाजपा कार्यकर्ताओं की बातों को सुना। उन्होंने सामाजिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि समाज में कई ऐसे काम हैं, जिन्हें सामूहिक प्रयासों से बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकता है।

उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ताओं को आश्वस्त किया कि यदि किसी सामाजिक कार्य के लिए सरकारी सहयोग की आवश्यकता महसूस होती है तो वे उनसे संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी जनहित के काम में सरकार की सहायता जरूरी होगी तो वह अपने स्तर पर संबंधित लोगों से बातचीत करने का प्रयास करेंगे।

उनका यह आश्वासन सामाजिक संगठनों के लिए महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा सकता है। दरअसल, कई सामाजिक संस्थाएं सीमित संसाधनों के बावजूद शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबों की सहायता, सामूहिक विवाह और जनजागरूकता जैसे क्षेत्रों में काम करती हैं। ऐसे संगठनों को उचित सहयोग और मार्गदर्शन मिले तो उनकी गतिविधियों का दायरा और प्रभाव बढ़ सकता है।

दिखावे की बढ़ती प्रवृत्ति पर जताई चिंता

संजय जोशी ने बातचीत के दौरान समाज में बढ़ती दिखावे की प्रवृत्ति पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आज के समय में लोगों के बीच वास्तविकता की तुलना में दिखावे को अधिक महत्व दिया जाने लगा है। कई बार व्यक्ति अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा प्रदर्शित करने के लिए ऐसे कार्य करता है, जिनका वास्तविक जनहित से कोई विशेष संबंध नहीं होता।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समाज को दिखावे के बजाय सच्चाई, ईमानदारी और अच्छे व्यवहार को महत्व देना चाहिए। लोगों को अपनी जीवनशैली और आदतों में सकारात्मक बदलाव लाने की आवश्यकता है। सामाजिक कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है कि वे लोगों को सही दिशा दिखाएं और उन्हें वास्तविक सामाजिक मूल्यों से जोड़ें।

उन्होंने कहा कि समाज में परिवर्तन केवल भाषण देने से नहीं आता, बल्कि इसके लिए व्यवहार में भी बदलाव लाना जरूरी है। जब व्यक्ति स्वयं अच्छे आचरण का उदाहरण प्रस्तुत करता है, तभी दूसरे लोग उससे प्रेरणा लेते हैं।

युवाओं को अच्छे संस्कार देना समय की जरूरत

अपने विचारों में संजय जोशी ने विशेष रूप से युवा पीढ़ी और संस्कारों के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि आज युवाओं को अच्छे संस्कार देना समाज की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक है। यदि वर्तमान पीढ़ी को सही मार्गदर्शन नहीं मिला तो आने वाले समय में सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

उन्होंने कहा कि हमारे बुजुर्गों ने हमें अच्छे संस्कार दिए हैं, इसलिए आज भी हम उनका सम्मान करते हैं और उनके बताए रास्ते को याद करते हैं। इसी प्रकार वर्तमान पीढ़ी का दायित्व है कि वह आने वाली पीढ़ियों को ऐसे संस्कार दे, जिनसे उनमें परिवार, समाज और देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित हो।

युवाओं को केवल शिक्षा और रोजगार तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है। उन्हें नैतिकता, अनुशासन, सेवा, सहयोग और सामाजिक संवेदनशीलता का महत्व भी समझाना जरूरी है। परिवार, विद्यालय और सामाजिक संस्थाएं इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

सामूहिक प्रयासों से मजबूत होगा समाज

सामूहिक विवाह जैसे आयोजनों का उल्लेख करते हुए सामाजिक सहयोग की भावना को भी महत्वपूर्ण माना गया। ऐसे आयोजन आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सहायता देने के साथ-साथ समाज में एकता और सहयोग का संदेश देते हैं। जब लोग मिलकर किसी जरूरतमंद परिवार की जिम्मेदारी उठाते हैं तो सामाजिक संबंध मजबूत होते हैं और समाज में सकारात्मक वातावरण तैयार होता है।

सामाजिक संगठनों को चाहिए कि वे स्थानीय समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम करें। शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता, महिला सशक्तीकरण, युवाओं के मार्गदर्शन और जरूरतमंद परिवारों की सहायता जैसे क्षेत्रों में लगातार प्रयास किए जा सकते हैं।

संजय जोशी का संदेश इसी व्यापक सोच को सामने रखता है कि समाज का विकास केवल सरकारी योजनाओं या राजनीतिक गतिविधियों पर निर्भर नहीं करता। इसमें आम नागरिकों, सामाजिक संस्थाओं, युवाओं और जनप्रतिनिधियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

समाज और देश के हित में निभानी होगी जिम्मेदारी

संजय जोशी के विचारों का मूल संदेश यही रहा कि व्यक्ति को अपने जीवन में समाज के प्रति जिम्मेदारी को समझना चाहिए। केवल अपने परिवार और व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित रहने के बजाय समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के लिए भी समय निकालना चाहिए।

उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ताओं को सच्चाई, अच्छे संस्कार और जनसेवा के रास्ते पर आगे बढ़ने का संदेश दिया। उनका मानना है कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन तभी संभव है, जब लोग अपने स्वार्थ से ऊपर उठकर दूसरों के हित के लिए काम करें।

आज जब सामाजिक जीवन में दिखावे और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा की प्रतिस्पर्धा बढ़ती दिखाई देती है, ऐसे समय में समाजसेवा, नैतिक मूल्यों और युवा पीढ़ी को संस्कारित करने पर दिया गया यह संदेश विशेष महत्व रखता है। राजनीति अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन समाज की मजबूती के लिए निस्वार्थ सेवा, मानवीय संवेदना और सामूहिक जिम्मेदारी की भूमिका हमेशा अहम रहेगी।

निष्कर्षतः, संजय जोशी का यह विचार समाज को एक महत्वपूर्ण दिशा देता है कि किसी व्यक्ति की सबसे बड़ी पहचान उसका पद नहीं, बल्कि समाज के प्रति उसका योगदान होना चाहिए। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार समाजहित में काम करे तो एक बेहतर, संस्कारित और मजबूत राष्ट्र के निर्माण का रास्ता प्रशस्त हो सकता है।

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