10 मई 1994… यह सिर्फ एक तारीख नहीं थी, बल्कि इंसानी इतिहास का वह क्षण था जब सदियों से दबाई गई एक आवाज सत्ता के सबसे ऊँचे मंच तक पहुँची। यह वह दिन था जब नेल्सन मंडेला ने दक्षिण अफ्रीका के पहले अश्वेत राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली और दुनिया को यह एहसास कराया […]
तमिल सिनेमा के सुपरस्टार से नेता बने सी जोसेफ विजय ने आज तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर इतिहास रच दिया। जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित भव्य समारोह में विजय ने तमिल भाषा में शपथ ली।शपथ के दौरान एक दिलचस्प पल भी देखने को मिला जब निर्धारित शपथ-पत्र से आगे बोलने पर राज्यपाल ने […]
रांची। सदस्य, राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा परिषद एवं सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय भारत सरकार से जुड़े रविंद्र तिवारी आज सड़क सुरक्षा और जनजागरूकता के क्षेत्र में एक सक्रिय, प्रभावशाली और सम्मानित व्यक्तित्व के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री Nitin Gadkari के करीबी मित्र एवं सहयोगी के […]
नई दिल्ली : पृथ्वीराज मीणा (P R MEENA) का जीवन प्रशासनिक उत्कृष्टता और सामाजिक प्रतिबद्धता का अनूठा उदाहरण है। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) से सेवानिवृत्त होने के बावजूद वे आज भी समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। उनका करियर न केवल एक सफल प्रशासनिक अधिकारी की कहानी है, बल्कि सेवा और […]
Dr. Rashmi Singh आज भारतीय प्रशासनिक सेवा की उन चुनिंदा अधिकारियों में गिनी जाती हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत, ईमानदारी और संवेदनशील कार्यशैली से प्रशासनिक क्षेत्र में अलग पहचान बनाई है। वर्ष 2007 बैच की आईएएस अधिकारी डॉ. रश्मी सिंह वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में आयुक्त एवं सचिव, आतिथ्य एवं प्रोटोकॉल विभाग के महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत […]
तमिलनाडु की राजनीति में जो कुछ आज दिख रहा है, वह भारतीय लोकतंत्र के उस पुराने दौर की याद दिलाता है जब चुनाव सिर्फ़ जनादेश नहीं, बल्कि सत्ता के लिए गणित, सौदेबाज़ी और रणनीति का अखाड़ा बन जाया करते थे। एक समय था जब देश की राजनीति में “हंग असेंबली” कोई असामान्य बात नहीं थी। […]
पश्चिम बंगाल में जीत के बाद एक नया ट्रेंड दिखाई दे रहा है। पहले जो बीजेपी कहा करती थी कि हमें मुसलमानों का वोट नहीं मिलता है, अब वही बीजेपी खुलेआम कहती है कि वह हिंदुओं के वोट से चुनाव जीती है। इसके साथ ही यह भी जोड़ देती है कि जो हमारे साथ था, […]
उत्तर प्रदेश : उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में कुछ अधिकारी ऐसे होते हैं जो अपने पद से नहीं, बल्कि अपने काम और सोच से पहचाने जाते हैं। 2011 बैच के आईएएस अधिकारी दीपक मीणा उन्हीं में से एक हैं, जो जुलाई 2025 से गोरखपुर के जिलाधिकारी के रूप में लगातार सुर्खियों में बने हुए […]
भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं जो केवल फिल्मकार नहीं, बल्कि एक पूरी सांस्कृतिक चेतना के प्रतिनिधि बन जाते हैं। सत्यजीत रे उन्हीं में से एक हैं। उनकी जयंती केवल एक कलाकार को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि उस दृष्टि, संवेदना और मानवीयता को पुनः समझने का दिन है, जिसने भारतीय […]
नई दिल्ली : राजनीति का चक्र बड़ा निर्दयी होता है। जो कभी “आम आदमी” के नाम पर व्यवस्था बदलने निकला था, आज उसी की पार्टी सत्ता, स्वार्थ और अवसरवाद की आँधी में बिखरती दिख रही है। सात राज्यसभा सांसदों का भाजपा में जाना केवल दल-बदल नहीं, यह उस नैतिकता के गुब्बारे की हवा निकलना है […]
मध्य-पूर्व का वर्तमान संकट आज किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है। यह धीरे-धीरे एक ऐसे वैश्विक मोड़ में बदल चुका है जहाँ ताकत, संसाधन, ऊर्जा, सुरक्षा और कूटनीति… सब एक साथ दांव पर लगे हुए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच लगातार बढ़ता तनाव, बातचीत का बार-बार विफल होना और क्षेत्रीय शक्तियों […]
हमारा समाज बड़ा उदार है। यहाँ लोग स्वयं चाहे जीवन की गाड़ी धक्के से चला रहे हों, पर दूसरों को जीवन-प्रबंधन पर ऐसा भाषण देंगे मानो ब्रह्मा जी ने सृष्टि-रचना से पहले इन्हीं से सलाह ली हो। सच ही कहा गया है “पर उपदेश कुशल बहुतेरे।” अर्थात् अपने जीवन का हिसाब भले ही अस्त-व्यस्त हो, […]
आज का मनुष्य जितना अपने दुःखों से नहीं टूटता, उससे कहीं अधिक वह दूसरों की खुशियों को देखकर भीतर ही भीतर बिखरने लगता है। यह केवल ईर्ष्या नहीं है, यह एक ऐसा अवसाद है जो तुलना की आग में जन्म लेता है और धीरे-धीरे आत्मा को खोखला कर देता है। पहले मनुष्य अपने जीवन को […]
आज के दौर में समाचार पत्रों और न्यूज़ चैनलों पर ‘लव जिहाद’ एक निरंतर चर्चा का विषय बना हुआ है। प्रश्न यह उठता है कि इस सोच की उत्पत्ति आखिर हुई कैसे? प्रेम के मार्ग से सब कुछ संभव है—यह धारणा रातों-रात पैदा नहीं हुई। सत्य तो यह है कि यह कोई तात्कालिक घटना नहीं, […]
समाजवाद के लिए आज बहुत बड़ा दिन है। हम पुरबिया भईया लोग समाजवाद को जीने वाले गिरमिटिया मजदूर लोग है। आज भाजपा ने समाजवाद को शिखर पर पहुँचा दिया।पूर्वांचल और बिहार समाजवाद की नर्सरी है और बनारस समाजवाद की राजधानी है।आचार्य नरेंद्र देव, राम मनोहर लोहिया, जय प्रकाश नारायण, राजनारायण जी, कर्पूरी ठाकुर से होते […]
भारतीय संस्कृति में नारी को सृष्टि की जननी, शक्ति और संवेदना का स्रोत माना गया है। हमारे शास्त्रों में स्पष्ट कहा गया है – “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता” – अर्थात जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहाँ देवताओं का वास होता है। किंतु यह आदर्श वाक्य आज भी व्यवहारिक जीवन में पूर्णतः साकार नहीं हो पाया है। आधुनिकता […]
भारत के ग्रामीण जीवन की असली तस्वीर समझनी हो तो हमें कुछ दशक पीछे झांकना होगा। आज भले ही खेती और उत्पादन के आधुनिक साधनों ने गांवों की तस्वीर बदल दी हो, लेकिन लगभग 40–50 साल पहले हालात बिल्कुल अलग थे। उस समय खेती पूरी तरह प्रकृति पर निर्भर थी और उपज इतनी कम होती […]