नयी दिल्ली: वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में देश की सरकारी तेल कंपनियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए ऊर्जा क्षेत्र में नई उम्मीदें जगा दी हैं। IOC, HPCL और BPCL ने जनवरी से मार्च तिमाही के दौरान संयुक्त रूप से लगभग ₹19,470 करोड़ का शुद्ध लाभ अर्जित किया। यह पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 41 प्रतिशत अधिक है। बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन, ईंधन की स्थिर मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अपेक्षाकृत संतुलन इस मजबूत कमाई के प्रमुख कारण रहे।
सबसे अधिक चर्चा इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) के प्रदर्शन की रही। कंपनी के मुनाफे में 56.6 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया। कंपनी को सबसे ज्यादा फायदा पेट्रोल, डीजल और एविएशन फ्यूल की मजबूत बिक्री से मिला। इसके अलावा रिफाइनिंग और मार्केटिंग मार्जिन में सुधार ने भी लाभ बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने लाभ में 46 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। कंपनी की रिफाइनरियों की क्षमता उपयोग दर ऊंची रही, जिससे उत्पादन और बिक्री दोनों में बढ़त हुई। वहीं भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (BPCL) का मुनाफा लगभग स्थिर रहा, लेकिन कंपनी ने मजबूत परिचालन और स्थिर बिक्री बनाए रखी, जिससे कुल परिणाम सकारात्मक रहे।
इन कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा रिफाइनिंग कारोबार से आया। जब कंपनियां कच्चे तेल को खरीदकर पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों में बदलती हैं, तो उन्हें रिफाइनिंग मार्जिन मिलता है। इस तिमाही में वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें अपेक्षाकृत नियंत्रित रहीं, जबकि घरेलू बाजार में ईंधन की मांग मजबूत बनी रही। इससे कंपनियों को अच्छा लाभ प्राप्त हुआ। इसके अतिरिक्त पेट्रोकेमिकल्स, गैस मार्केटिंग और खुदरा ईंधन बिक्री से भी इन कंपनियों की आय में बढ़ोतरी हुई। हवाई यात्रा और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आने से एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) और डीजल की मांग बढ़ी, जिसने तेल कंपनियों की कमाई को और मजबूत किया।
पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें तो तीनों सरकारी तेल कंपनियों का संयुक्त शुद्ध लाभ ₹77,280 करोड़ के पार पहुंच गया है। यह पिछले वित्त वर्ष की तुलना में लगभग 130 प्रतिशत अधिक है। विशेषज्ञों के अनुसार बीते एक साल में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव नहीं हुआ, जिससे कंपनियों को स्थिर लागत पर कारोबार चलाने में मदद मिली। साथ ही भारत में लगातार बढ़ती वाहन संख्या, औद्योगिक उत्पादन और परिवहन क्षेत्र की मांग ने पेट्रोलियम उत्पादों की खपत को ऊंचा बनाए रखा।
वही पर आज चौथी बार तेल की कीमतों में ईजाफा हुआ है लेकिन कच्चे तेल की कीमतें भविष्य में एक बड़ी चुनौती बन सकती हैं। पिछले कुछ महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में भू-राजनीतिक तनाव, तेल उत्पादक देशों द्वारा उत्पादन में कटौती और वैश्विक मांग बढ़ने के कारण कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेजी देखने को मिली है। यदि ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगातार ऊंची रहती हैं, तो इसका सीधा असर भारत जैसी आयात-निर्भर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है, इसलिए तेल महंगा होने पर कंपनियों की लागत बढ़ जाती है। इससे पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर दबाव बन सकता है। हालांकि फिलहाल सरकारी तेल कंपनियों ने बेहतर इन्वेंट्री प्रबंधन और मजबूत रिफाइनिंग मार्जिन के जरिए इस दबाव को काफी हद तक संतुलित किया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 80 से 90 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में नियंत्रित रहती हैं, तो भारतीय तेल कंपनियां आगे भी अच्छा प्रदर्शन जारी रख सकती हैं।
तेल कंपनियों के मजबूत वित्तीय नतीजों का असर शेयर बाजार में भी दिखाई दिया। निवेशकों ने इन कंपनियों के शेयरों में दिलचस्पी दिखाई, जिससे ऊर्जा क्षेत्र के शेयरों में तेजी देखने को मिली। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में यदि घरेलू मांग मजबूत बनी रहती है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बहुत अधिक नहीं बढ़तीं, तो सरकारी तेल कंपनियां आगे भी अच्छे नतीजे पेश कर सकती हैं।
सरकार के लिए भी यह प्रदर्शन राहत भरा माना जा रहा है। इन कंपनियों से मिलने वाला लाभांश और कर राजस्व सरकारी आय को मजबूत करेगा। साथ ही ऊर्जा क्षेत्र की मजबूती देश की आर्थिक वृद्धि के लिए भी सकारात्मक संकेत देती है। कुल मिलाकर, वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही सरकारी तेल कंपनियों के लिए बड़ी सफलता साबित हुई है, जिसने यह संकेत दिया है कि भारतीय ऊर्जा क्षेत्र अभी भी मजबूत विकास की क्षमता रखता है।